
जयपुर. राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने कोटा रेलवे स्टेशन से दस दिन पहले अपह्रत चार वर्षीय बालक को सोमवार रात को जयपुर के विद्याधर नगर में किशनबाग स्थित एक खानाबदोश परिवार के पास दस्तयाब किया है। एडीजी (रेलवे) अनिल पालीवाल ने बताया कि जीआरपी टीम ने सूचना के बाद खानाबदोश परिवार की घेराबंदी कर दबोचा तो एक चौंकाने वाला खुलासा और हुआ। परिवार ने 10 वर्ष पहले गंगापुर सिटी रेलवे स्टेशन से एक और बच्चे का अपहरण किया था। वह बच्चा भी परिवार के पास मिला। गंगापुर सिटी जीआरपी में 10 वर्ष पहले एक बच्चे के अपहरण की रिपोर्ट भी दर्ज है।
कोटा से अपह्रत बच्चे को परिवार जयपुर में इधर-उधर ले जा रहा था। पुलिस ने बच्चे को ढेहर के बालाजी में परिवार के साथ दस्तायाब किया। पूछताछ में परिवार ने बताया कि पहले उनका मूल काम मदारी का था और जानवरों पर प्रतिबंध लगने के बाद वह बच्चों को जमूरा (करतब दिखाने) बनाकर खेल दिखाते हैं। कोटा रेलवे स्टेशन से बच्चे का अपहरण जमूरा बनाने के लिए किया था। मूलत: हरियाणा के भिवानी हाल किशनबाग झुग्गी झौपड़ी निवासी प्रेम सिंगीवाल (65) उसकी पत्नी लज्जो (55), बेटा अर्जुन (30), कर्ण (22) व मुख्य सरगना मुकेश मदारी (19) को गिरफ्तार किया।
कोटा से बच्चे का अपहरण करने के बाद अपहरणकर्ताओं के भोपाल की तरफ जाने का पता चला। जीआरपी के एसपी राममूर्ति जोशी ने बताया कि कोटा शहर के बाहर निकलने के बाद अपहरणकर्ता हाईवे के एक ढाबे पर ठहरे। वहां पर एक व्यक्ति को शक होने पर उसने बच्चे के संबंध में पूछताछ की। उक्त व्यक्ति ने बच्चे की मां से बात करवाने के लिए कहा तो आरोपियों ने मोबाइल नहीं होना बताया। उक्त व्यक्ति ने खुद का मोबाइल दिया और बात करवाने के लिए कहा। सरगना मुकेश ने मां को दिए खुद के मोबाइल पर घंटी दी, लेकिन मोबाइल रिसीव नहीं हुआ।
जीआरपी टीम ढाबा वाले की सूचना पर उक्त व्यक्ति को तलाशते हुए उसके पास पहुंची। व्यक्ति ने बताया कि उसने अपना मोबाइल बेच दिया। टीम उस व्यक्ति के पास पहुंची, जिसने मोबाइल खरीदा था। उस व्यक्ति से मोबाइल लिया गया तो उसमें सरगना मुकेश के नंबर सुरक्षित मिल गए। नंबरों से पता चला कि यह विद्याधर नगर स्थित किशनबाग क्षेत्र के हैं। तब आरोपियों को पकड़ा गया। आरोपी मुकेश बच्चे को पहले भोपाल में अपने ससुराल ले गया, लेकिन ससुराल वालों ने अपहृत बच्चे को रखने से मना कर दिया, तब वह भोपाल से ट्रेन में जयपुर पहुंचा था।
एसपी जोशी ने बताया कि आरोपियों के पास से दस वर्ष पहले अपहृत बच्चा भी मिला है। उसके परिजन से डीएनए टेस्ट करवाया जाएगा। इसके बाद बच्चा उनके सुपुर्द किया जाएगा। वह बच्चा मानसिक रूप से कमजोर है। आशंका है कि बच्चे की दिमागी हालत कमजोर करने के लिए उसे कुछ खिला दिया। यह भी आशंका है कि गैंग बच्चों से चोरी करवाने का काम करती है। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
एडीजी पालीवाल बताया कि बच्चे का अपहरण करने वाला मास्टर माइंड मुकेश मदारी है। वह परिवार के साथ किशनगढ़ (अजमेर) में एक शादी समारोह में परिवार के साथ बर्तन साफ करने के लिए गया था। यहां तीन दिन तक रहा। फिर वहां से 5 मई की सुबह 11 बजे अपना मोबाइल मां लज्जो को देकर एक बाइक चोरी कर भाई करण के साथ शाम तक कोटा पहुंच गया। कोटा रेलवे स्टेशन पर बच्चे के पिता उसे अकेले बैठाकर टिकट लेने चले गए। तभी आरोपी बच्चे को उठाकर ले गए। जीआरपी कोटा के वृत्ताधिकारी चांदमल के नेतृत्व में 5 टीमें बनाई गईं। बच्चे की तलाश में 280 किलोमीटर क्षेत्र में 470 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई।
जयपुर जीआरपी थाने में मासूम अपनी मां की गोद में आते चेहक उठा। एक पुलिसकर्मी ने बच्चे से पूछा कि उसे कौन ले गया, तब उसने कुछ दूर खड़े आरोपी मुकेश की तरफ अंगुली से इशारा करते हुए बताया कि वह ले गया था।
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Published on:
15 May 2024 09:44 am
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