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राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर क्यों हो रही सियासत? कांग्रेस बोली- बाबाओं के दबाव में सरकार

राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव से पहले भजनलाल शर्मा सरकार ने दो से अधिक संतान वाले उम्मीदवारों पर लगी चुनावी पाबंदी हटाई। सरकार इसे बदलती परिस्थितियों का तकाजा बता रही है। वहीं, विपक्ष ने इसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री के एजेंडे से जोड़कर तीखा हमला बोला है।

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जयपुर

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Arvind Rao

Feb 26, 2026

Rajasthan Panchayat Elections Rule Change 2-Child Norm Scrapped Congress Links Move to Dhirendra Shastri Agenda

टीकाराम जूली, धीरेंद्र शास्त्री और गोविंद सिंह डोटासरा (पत्रिका फाइल फोटो)

Rajasthan Panchayat Elections 2026: राजस्थान की राजनीति में पंचायत और निकाय चुनावों से ठीक पहले एक बड़े कानूनी बदलाव ने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने 30 साल पुराने उस नियम को खत्म करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत दो से अधिक संतान वाले व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माने जाते थे।

बता दें कि जहां सरकार इसे बदलती परिस्थितियों का तकाजा बता रही है। वहीं, विपक्ष ने इसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री के एजेंडे से जोड़कर तीखा हमला बोला है।

क्या है नया बदलाव?

राजस्थान सरकार ने राजस्थान पंचायतीराज संशोधन विधेयक और राजस्थान नगरपालिका संशोधन विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब प्रदेश में दो से ज्यादा बच्चे होने के बावजूद कोई भी व्यक्ति पंच, सरपंच, पार्षद या मेयर का चुनाव लड़ सकेगा।

मंत्री जोगाराम पटेल ने स्पष्ट किया कि 1995 में जब यह प्रावधान लागू किया गया था, तब मुख्य उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण था। लेकिन अब तीन दशक बाद परिस्थितियां बदल चुकी हैं और लोकतांत्रिक भागीदारी को व्यापक बनाने के लिए इस बाध्यता को हटाना जरूरी हो गया है।

भैरो सिंह शेखावत युग के नियम का अंत

गौरतलब है कि यह नियम 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता भैरो सिंह शेखावत की सरकार के दौरान लागू किया गया था। उस समय राजस्थान जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में कड़े कदम उठाने वाला अग्रणी राज्य बना था।

अब अपनी ही पार्टी की पुरानी नीति को पलटकर भजनलाल सरकार ने एक नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले से जमीनी स्तर के उन हजारों कार्यकर्ताओं को राहत मिलेगी जो तीसरी संतान के कारण चुनावी दौड़ से बाहर थे।

"बाबाओं और RSS के दबाव में सरकार"

कांग्रेस ने इस फैसले को 'मास्टरस्ट्रोक' मानने से इनकार करते हुए इसे 'प्रतिगामी' करार दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC) गोविंद सिंह डोटासरा ने सीधे तौर पर सरकार को घेरते हुए कहा कि यह फैसला जनहित में नहीं, बल्कि संघ प्रमुख मोहन भागवत और धीरेंद्र शास्त्री जैसे लोगों को खुश करने के लिए लिया गया है।

"राजस्थान में क्या कानून बनेगा, यह अब निर्वाचित सरकार नहीं बल्कि मोहन भागवत और धीरेंद्र शास्त्री तय कर रहे हैं। एक तरफ जनसंख्या नियंत्रण की बात होती है और दूसरी तरफ वोट बैंक की राजनीति के लिए नियमों को ताक पर रख दिया गया है।" डोटासरा ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत और निकाय चुनाव में हार के डर से भाजपा ने यह रास्ता चुना है ताकि चुनाव को टाला जा सके या नियमों में उलझाया जा सके।
-गोविंद सिंह डोटासरा

धीरेंद्र शास्त्री का 'चार बच्चे' वाला बयान और विवाद

इस पूरे मामले ने तब और तूल पकड़ा जब हाल ही में पुष्कर में आयोजित हनुमान कथा के दौरान बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदुओं से 'चार बच्चे' पैदा करने की अपील की थी। उन्होंने जनसंख्या असंतुलन का हवाला देते हुए कहा था कि जब वे शादी करेंगे तो खुद भी इसमें योगदान देंगे। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने शास्त्री के इसी बयान और संघ की विचारधारा को कानूनी अमलीजामा पहनाने के लिए यह बदलाव किया है।

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने तीखा सवाल दागते हुए कहा, जनसंख्या के मामले में हम चीन को पीछे छोड़ चुके हैं। देश के सीमित संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार परिवार नियोजन के संदेश को कमजोर क्यों कर रही है? धीरेंद्र शास्त्री एक धार्मिक व्यक्ति हैं, उन्हें राजनीति के बजाय धर्म की बात करनी चाहिए।

"यह समय की मांग है"

विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि इस फैसले का किसी के बयान से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने तर्क दिया, अगर हम धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर चलते, तो शायद तीन या चार बच्चों की बात करते।
यह फैसला केवल प्रशासनिक और व्यावहारिक जरूरतों को देखते हुए लिया गया है। राठौड़ ने जोर देकर कहा कि आम जनता वैसे भी जागरूक है, लेकिन चुनावी अयोग्यता का यह प्रावधान कई योग्य उम्मीदवारों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से दूर रख रहा था।