
Strange Names
Strange Girls Name In Rajasthan : जयपुर। कहने और करने को तो हम 21वीं सदी की बात करते हैं, लेकिन आज भी कई घटनाएं ऐसी घटित हो रही है, जिसे देखकर ओर सुनकर ऐसा लगता है। जैसे मानों आज भी समाज पिछड़ा हुआ हो राजस्थान के दूरदराज के इलाकों में जब बेटियां दूसरी, तीसरी या चौथी बार पैदा हो जाती थी। तो उनके नाम भी एक बोझ की तरह रखे जाते थे। जैसे उसका उदाहरण है, धापू ऐसा माना जाता है कि यह नाम जब तीसरी या चौथी बार बेटी पैदा होती थी। तो रख दिया जाता था। और इसका अर्थ होता है, भगवान अब बहुत हो गया।
हालांकि बदलते वक्त के साथ ही शिक्षा के प्रचार-प्रसार के बाद काफी बदलाव आया है। लेकिन आज भी दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में इसी तरीके से जब लड़कियां बोझ बन जाती है। तो उनका नामकरण इसी तरीके से कर दिया जाता है। जिसका दंश बेटियां अपने नाम पर पूरी जिंदगी भुगतती है। लेकिन ये चलन अब राजधानी जयपुर शहर में भी देखने को मिल रहा है।
जहां शहर के नगर निगम में बच्ची के बर्थ सर्टिफिकेट पर धापू, मरी, माफी, अंतिम, फालतू, नाराजी, काली नामों से माता-पिता अपनी बेटियों के बर्थ सर्टिफिकेट बनवा रहें है। पत्रिका सवांददाता ने जब शहर के सरकारी स्कूल में पड़ताल की तो स्कूल में पढऩे वाली बच्चियों ने बताया कि हमारी कई सहेलियों के भी ऐसे अटपटे नाम हैं, लेकिन कई तो स्कूल भी नहीं आती हैं। कई छात्राओं को तो अपने नाम का अर्थ भी नहीं पता था। माफी नाम बहुत कॉमन राजस्थान में माफी नाम बहुत कॉमन नाम है।
जयपुर के एक सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले सरकारी शिक्षक का कहना है, कि कई लड़कियों के नाम माफी रखे जाते हैं। जिसका मतलब है, कि परिवार भगवान से दूसरी बेटी को जन्म देने की माफी मांग रहा है। सरकारी स्कूल में पढऩे वाली धापू नाम की छात्रा का कहना है, कि मुझे मेरे नाम से हर पल शर्मिंदगी महसूस कराता है। और यह याद दिलाता है कि मैं चौथी संतान के रूप में अपने परिवार पर बोझ हूं। और घर में बापू कहता है की अब जो लड़की होगी उसका भी नाम धापू ही रखेंगे।
-पहले राजस्थान में बेटियों को पैदा होते ही मार दिया जाता था। और बेटों की चाह में एक घर में ज्यादा बेटियां होने पर बिना चाहत के उनका नाम रख देते थे, लेकिन समाज में आज भी लड़कियों के नाम अजीबो-गरीब रखें जा रहे है। वीना श्रीवास्तव, (सामाजिक कार्यकर्ता)
-समाज में लड़कियों के नाम अच्छे रखने चाहिए। जब वो किसी बड़े पद पर होगी तो उसके नाम के कारण उसे शर्मिंदगी महसूस नहीं करनी पड़ेगी। इनाया खान (बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जिला ब्रांड एंबेसेडर)
Published on:
10 Nov 2023 06:13 pm
