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राजस्थान पत्रिका फिर प्रदेश में बना सिरमौर, प्रतिस्पर्धी अखबार से 21 लाख 17 हजार पाठक संख्या ज्यादा

-राजस्थान पत्रिका ही राजस्थान की आन—बान—शान - भारतीय पाठक सर्वेक्षण (आइआरएस) के नतीजों में 80 लाख 46 हजार औसत पाठक - प्रतिस्पर्धी अखबार 59 लाख 29 हजार औसत पाठकों तक सिमटा -सारे हिंदी अखबारों की औसत दैनिक पाठक संख्या के जोड से भी राजस्थान पत्रिका के 10 लाख 41 हजार पाठक ज्यादा

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जयपुर

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Abdul Bari

Apr 27, 2019

patrika sirmaur

राजस्थान पत्रिका फिर प्रदेश में बना सिरमौर, प्रतिस्पर्धी अखबार से 21 लाख 17 हजार पाठक संख्या ज्यादा

मुंबई/जयपुर।

छह दशक से अधिक समय से राजस्थान के पाठकों के दिल की पहली पसंद बने हुए राजस्थान पत्रिका ने एक बार फिर राजस्थान के अखबार जगत में अपना डंका बजाया है। भारतीय पाठक सर्वेक्षण (आइआरएस)—2019 (प्रथम तिमाही) के ताजा नतीजों के मुताबिक राजस्थान पत्रिका अपनी औसत दैनिक पाठक संख्या 80 लाख 46 हजार के साथ एक बार फिर से सिरमौर बना है। वहीं, औसत दैनिक पाठक संख्या में प्रतिस्पर्धी समाचार पत्र 59 लाख 29 हजार तक सिमट गया है। पिछले आइआरएस की तुलना में प्रदेश में राजस्थान पत्रिका के कुल पाठकों की संख्या में 18 लाख 77 हजार की बढोत्तरी हुई है। अपनी यह सफलता हम अपने पाठकों को ही समर्पित करते हैं क्योंकि उनके सहयोग से ही यह इतिहास रचा गया है।


निकटतम प्रतिस्पर्धी से 36 प्रतिशत अधिक
विश्वसनीय खबरों और दमदार कवरेज के दम पर राजस्थान पत्रिका ने अपने प्रतिस्पर्धी अखबार पर 21 लाख 17 हजार पाठक संख्या की भारी बढ़त हासिल की। यह प्रतिस्पर्धी अखबार से 36 प्रतिशत अधिक है। इतना ही नहीं राजस्थान पत्रिका की औसत दैनिक पाठक संख्या प्रदेश भर में पढ़े जाने वाले सभी हिंदी दैनिक समाचार पत्रों की औसत दैनिक पाठक संख्या के जोड से भी 10 लाख 41 हजार अधिक है। आइआरएस का यह सर्वेक्षण भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे आधुनिक पाठक सर्वेक्षण है।

विधानसभा कवरेज का डंका: बदलाव के नायक बन विधानसभा पहुंचे 30 चेंजमैकर

विधानसभा चुनाव के महाकवरेज और चेंजमैकर अभियान से राजस्थान पत्रिका पाठकों के दिलों का सरताज बन गया है। चुनावों के दौरान पत्रिका ने स्वच्छ राजनीति के लिए राज्य के चप्पे—चप्पे पर जागो जनमत और चेंजमैकर अभियान चलाया। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। स्वच्छ छवि के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं को पत्रिका के जरिये आगे बढऩे का मौका मिला। हमारे चेंजमैकर अभियान से ही जुडकर 30 आम आदमी बदलाव के नायक बने और राजस्थान व मध्यप्रदेश विधानसभा में चुनकर पहुंचे। लोकसभा चुनाव—2019 के दौरान भी पत्रिका का यह अभियान जारी है।


काला कानून के खिलाफ दमदार महाभियान
अपनी धारदार और निष्पक्ष पत्रकारिता के रूप में राजस्थान पत्रिका की धाक जनमानस के बीच और बढी है। राजस्थान में सरकार जिस तरह से भ्रष्ट राजनेताओं व नौकरशाहों को बचाने के लिए काला कानून लेकर आई उसके खिलाफ भी पत्रिका के रुख को पाठकों ने अपार समर्थन दिया है। इसके लिए पत्रिका ने न तो विज्ञापनों की परवाह की और न ही अन्य प्रलोभनों की। इसी के परिणामस्वरूप राजस्थान में पत्रिका के आसपास कोसों तक कोई प्रतिस्पर्धी नहीं है।