
एक थी पॉइंट थ्री नॉट थ्री, कभी थी राजस्थान पुलिस की शान, अब हो गई गुजरे जमाने की बात
मुकेश शर्मा / जयपुर. एक थी .303 बोर राइफल। राजस्थान पुलिस की 53 वर्ष तक भरोसेमंद साथी। अब इतिहास के पन्नों में पढऩे को मिलेगी। राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने अपनी सभी 28130 राइफल .303 बोर को गला दिया है। सूत्रों के मुताबिक गलाने के बाद राइफल के स्क्रैप (आयरन) को 11 लाख 60 हजार 150 रुपए में नीलाम कर दिया गया।
राजस्थान पुलिस को 1966 में राइफल .303 बोर मिली थी, वर्ष 2018 तक पुलिस की शान रही। इसके बाद पीएचक्यू ने प्रदेश के थानों, बटालियन और अन्य विंग से सभी 28130 राइफल वापस मंगवा ली और इनकी जगह अत्याधुनिक हथियार पुलिस को दिए। वहीं केन्द्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी एसओपी के दिशा निर्देश से गठित बोर्ड ऑफ ऑफिसर ने सभी राइफल .303 बोर ईशापुर स्थित भारतीय मेटल एवं इस्पात फैक्ट्री में गलाने के लिए भेज दी।
बोर्ड के अधिकारियों के समक्ष इस राइफल के साथ प्रदेश पुलिस के कुछ अनुपयोगी एवं अप्रचलित हथियार भी गला दिए गए। राइफल के निस्तारण से मिले आयरन को नीलाम करके 11,60,150 रुपए राजस्थान पुलिस को दिए गए। नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कुछ अधिकारियों ने कहा कि पुराने हथियार पुलिस प्रशिक्षण केन्द्रों पर रखे जाने चाहिए, जिससे आने वाले नए पुलिसकर्मी इतिहास के हथियारों से रू-ब-रू हो सकें।
तांबा-पीतल जयपुर में गलाने को दिया
28130 राइफल .303 बोर से निकले 3508.730 किलोग्राम पीतल, 408.240 किग्रा. एल्यूमिनियम और 01.560 किग्रा. तांबे को घाटगेट स्थित आरएसी पांचवीं बटालियन में गलाया जा रहा है।
यह थी खासियत
- लकड़ी की बॉडी होने से गोली चलाने पर गर्म नहीं होती थी
- मैनुअल होने से गोली फंसने की शिकायत नहीं थी
- ग्रेनेट लांचर के तौर पर भी काम करती थी
- 300 मीटर तक रेंज, बुलेट बड़ी होती थी
- वजन होने से निशाना सटीक लगता था
- मैग्जीन गिरने की शिकायत नहीं थी
यह कमियां
- स्वचालित नहीं थी
- मैग्जीन में 13 गोली की क्षमता, एक फायर करने के बाद दूसरे फायर के लिए लोड करना पड़ता था, इससे समय अधिक लगता था।
- वजन अधिक होने से लंबे समय तक साथ लेकर चलने में परेशानी होती थी
- इससे निकली गोली किसी व्यक्ति को लग जाए तो उसकी मौत होना लगभग तय
Published on:
17 Sept 2022 03:34 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
