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हमारी वफादारी में कमी होती तो पहले ही गिर चुकी होती गहलोत सरकार: महेश जोशी

गहलोत समर्थक जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी ने आज कहा हैं कि हमारी वफादारी पर शक किया जा रहा हैं, यदि हमारी वफादारी में कमी होती तो राजस्थान की कांग्रेस सरकार पहले ही गिर चुकी होती।

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जयपुर

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Rahul Singh

Sep 27, 2022

mahesh joshi

mahesh joshi

गहलोत समर्थक जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी ने आज कहा हैं कि हमारी वफादारी पर शक किया जा रहा हैं, यदि हमारी वफादारी में कमी होती तो राजस्थान की कांग्रेस सरकार पहले ही गिर चुकी होती। जोशी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हमारी वफादारी पर कोई सवाल ही खड़ा नहीं होता है। जोशी ने मंत्री राजेन्द्र गुढ़ा के बयानों पर कहा कि वे मेरे छोटे भाई जैसे हैं लेकिन उन्हें अपने बयानों में गरिमा रखनी चाहिए। राजनीति में विचारधाराओं का विरोध हो सकता है, लेकिन विरोधियों के लिए भी शब्दों में सम्मान और मर्यादा होनी चाहिए।

जोशी ने कहा कि आलाकमान के निर्देश पर विधायक दल की बैठक सीएमआर में शाम 7 बजे बुलाई थी। हमें विधायक दल की बैठक का एजेंडा पता नहीं था। हम नहीं चाहते थे कि विधायक दल की बैठक में कोई अशांति हो। ना ही किसी भी विधायक को धारीवाल के घर बैठक के लिए कहा गया। विधायक दल की बैठक में हमेशा सामूहिक बात होती है। जोशी ने कहा कि मुझ पर आरोप क्यों लगाए जा रहे हैं ? मैं तो शनिवार को देर रात तक विधायकों को बैठक के लिए फोन करता रहा।

पायलट दिल्ली पहुंचे लेकिन साधे रखी चुप्पी
राजस्थान में सीएम को लेकर सियासी संग्राम के बीच पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट आज दिल्ली पहुंच गए लेकिन उन्होंने मीडिया से चुप्पी साधे रखी। माना जा रहा हैं कि पायलट अभी आलाकमान का रुख देखना चाह रहे हैं और जो भी कुछ राजस्थान की राजनीति में चल रहा हैं उसमें कोई बयान देकर अपना खेल नहीं बिगाड़ना चाह रहे हैं। पायलट की आज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात भी हो सकती हैं। इस मुलाकात के बाद ही राजस्थान की कांग्रेस राजनीति के अगले समीकरण का पता लग सकता हैं। सचिन पायलट दोपहर में हवाई जहाज से जयपुर से दिल्ली आए हैं।

गुढ़ा बोले, प्रताप सिंह को तो फिल्मों में खलनायक का रोल करना चाहिए, अमरीशपुरी को भी पीछे छोड़ देंगे

गहलोत सरकार के मंत्री राजेन्द्र सिंह गुढ़ा ने आज कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास पर जमकर हमला बोला। गुढ़ा ने कहा कि प्रताप सिंह को तो फिल्मों में खलनायक का रोल करना चाहिए, अमरीश पुरी को भी पीछे छोड़ देंगे। जो शोले फिल्म में गब्बर सिंह था, उसके जैसे बात बोल रहे हैं कि खून की नदियां बहा देंगे, सडके लाल कर देंगे, इन्हें इसलिए मंत्री बनाया गया था क्या। आखिर क्या बोल रहे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष के लिए बंसल ने लिया नामांकन पर्चा-
राजस्थान में नए सियासी घटनाक्रम के बाद अब कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए अब नए नाम सामने आने लगे हैं। कांग्रेस के कोषाध्यक्ष पवन बंसल ने आज नामांकन फार्म ले लिए और माना जा रहा हैं कि वे भी अपना पर्चा दाखिल करेंगे। नामांकन की आखिरी तारीख 30 सितंबर हैं।

गहलोत कैंप फिलहाल कर रहा वेट एंड वॉच
राजस्थान में नए सीएम के चयन को लेकर मामला फिलहाल तो उलझ गया हैं और कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा सियासी संकट राजस्थान हैं और पार्टी कैसे भी इसे दूर करना चाहती हैं लेकिन अभी तो ऐसा लगता नहीं हैं कि ये संकट हल हो जाए। वहीं कांग्रेस विधायक दल की बैठक का बहिष्कार करने के बाद कैबिनेट मंत्री शांति धारीवाल, महेश जोशी और प्रताप सिंह खाचरियावास पर कार्रवाई की तलवार तो लटक ही गई हैं। इनमें से धारीवाल ने तो कल राजस्थान प्रभारी अजय माकन पर पायलट के पक्ष में होने के आरोप लगा दिए थे जिसके बाद ये माना जा रहा हैं कि कांग्रेस इन पर कोई कार्रवाई करेगी। गहलोत कैंप और उनके विधायक अब वेट एंड वॉच कर रहे हैं और वे इस इंतजार में हैं कि यदि आलाकमान उन पर कोई कार्रवाई करता हैं तो वे अगले कदम उठाएंगे। ऐसे में अभी कुछ समय लगेगा क्यों कि कांग्रेस आलाकमान अब सारे पहलू देखकर ही कोई फैसला करेगा।

आज देंगे सोनिया को रिपोर्ट- दूसरी ओर प्रभारी अजय माकन मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपनी रिपोर्ट सौंपेगे। प्रभारी माकन और पर्यवेक्षक खडगे सोमवार को सोनिया गांधी से मिले थे और उन्हें विस्तार से सारी जानकारी दी थी जिसके बाद उन्हें लिखित में पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट देने को कहा था। राजस्थान में रविवार को चले पूरे मामले को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष ने अजय माकन और अन्य नेताओं से विचार विमर्श किया था और उसके बाद माकन ने मीडिया को इस बारे में जानकारी दी। माकन ने ये भी कहा कि रविवार की विधायक दल की बैठक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कहने पर ही बुलाई गई थी और उसका समय और स्थान भी सीएम ने ही तय किया था। उन्होंने कहा कि विधायकों ने विधायक दल की बैठक में नहीं आकर अनुशासनहीनता की है। हम कल उनसे वन टू वन संवाद भी करते और एक लाइन का प्रस्ताव भी पास करते। इसके बाद सोनिया गांधी को विधायकों की भावना और सारी जानकारी देते, इसके बाद ही कोई फैसला होता। उन्होंने कहा कि विधायकों के प्रतिनिधियों ने इसमें तीन शर्त जोडने को कह रहे थे जो गलत है।