
पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर . कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर सीएम अशोक गहलोत के नामांकन भरने की घोषणा के बाद सचिन पायलट बेहद उत्साहित नजर आ रहे थे। उन्हें उम्मीद थी ज्यादातर विधायकों का सर्मथन उन्हें मिलेगा और वे मुख्यमंत्री पद हासिल करने की अपनी इच्छा पूरी कर सकेंगे। लेकिन हुआ एकदम उलट।
सचिन को यह कतई उम्मीद नहीं होगी कि रविवार को जयपुर पहुंचने पर उनके साथ वही गिने-चुने विधायक होंगे। पायलट को दिल्ली से यह कहकर भेजा गया था कि उनके साथ जो कुछ होगा वह अच्छा होगा, बशर्ते वे शांति बनाए रखे। अपने समर्थकों को काबू में रखने के अलावा अनर्गल बयानबाजी से बचें। पायलट ने एकदम यही सब किया। लेकिन शाम होते-होते उन्हें समझ आ गया कि उनकी दाल नहीं गलने वाली है।
पायलट समर्थकों को जरा सा भी आभास नहीं था कि शांति धारीवाल के सरकारी आवास पर क्या खिचड़ी पक रही है। जब बैठकों का समय हर आधा घंटे बाद बढ़ाया जाने लगा, तब जाकर उन्हें माजरा समझ आया। इससे पहले ज्यादातर पायलट समर्थक मुख्यमंत्री आवास पहुंच गए थे। रात साढ़े नौ बजे तक करीब दो दर्जन विधायक सीएम निवास पर थे। जिनमें से 18 से 20 के करीब पायलट समर्थक बताए जाते हैं।
पर्यवेक्षकों से चर्चा:
मुख्यमंत्री निवास के भीतर एक कक्ष में गहलोत, पायलट, अजय माकन, मल्लिकार्जुन खड़गे और काजी निजामुद्दीन आपस में मंत्रणा कर रहे थे। पीसीसी चीफ डोटासरा, गुजरात के प्रभारी रघु शर्मा, जाहिदा खान और दिव्या मदेरणा भी सीएमआर में मौजूद थे।
Published on:
26 Sept 2022 02:08 pm

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