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राजस्थान के सियासी संग्राम का साइड इफेक्ट, महापौर पद से सौम्या गुर्जर की छुट्टी, छह साल तक नहीं लड़ सकेंगी चुनाव

राज्य सरकार ने मंगलवार को एक आदेश जारी कर ग्रेटर नगर निगम महापौर सौम्या गुर्जर को महापौर पद से बर्खास्त दिया है। साथ ही उनकी नगर निगम की सदस्यता को खत्म करते हुए 6 साल तक निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है।

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जयपुर

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Umesh Sharma

Sep 27, 2022

राज्य सरकार ने मंगलवार को एक आदेश जारी कर ग्रेटर नगर निगम महापौर सौम्या गुर्जर को महापौर पद से बर्खास्त दिया है। साथ ही उनकी नगर निगम की सदस्यता को खत्म करते हुए 6 साल तक निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है। पूर्व आयुक्त यज्ञ मित्र सिंह देव के साथ बदसलूकी मामले में आई न्यायिक रिपोर्ट और 23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट से मिले आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई है। गुर्जर के पास अब केवल हाईकोर्ट जाने का विकल्प बचा है। उधर पूरे मामले में गुर्जर ने कहा है कि संघर्ष मेरा जीवन और मैं संघर्ष करती रहूंगी।

इससे पहले भी पिछले साल जून में सौम्या गुर्जर को इस पद से हटाया गया था और उनकी जगह शील धाभाई को कार्यवाहक महापौर बनाया गया था। लेकिन कोर्ट से स्टे मिलने के बाद इस साल फरवरी में सौम्या गुर्जर वापस महापौर की कुर्सी पर काबिज हुई थी। इसके बाद सरकार की ओर से करवाई गई न्यायिक रिपोर्ट में महापौर के साथ तीन अन्य पार्षदों को दोषी पाया गया है। सरकार ने रिपोर्ट आने के बाद वार्ड 72 से पार्षद पारस जैन, वार्ड 103 से शंकर शर्मा और वार्ड 39 से अजय सिंह को बर्खास्त कर दिया था। सौम्या गुर्जर मामले में रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई, जहां से आदेश मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है।


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यूं चला घटनाक्रम

-पिछले साल 4 जून को ग्रेटर मुख्यालय पर महापौर सौम्या गुर्जर और अन्य पार्षदों का तत्कालीन आयुक्त यज्ञमित्र सिंह देव क साथ मनमुटाव हुआ।
-कमिश्नर से आरोप लगाा कि वे बैठक छोड़कर जाने लगे तो पार्षदों ने उन्हें गेट पर रोक दिया और मारपीट और धक्का-मुक्की की।
-इसम मामले में आयुक्त ने सरकार को लिखित में शिकायत की और ज्योति नगर थाने में मामला दर्ज करवाया।
-5 जून को सरकार ने शिकायत की जांच स्वायत्त शासन निदेशालय की क्षेत्रीय निदेशक को सौंप दी।
-6 जून को जांच रिपोर्ट में चारों को दोषी मानते हुए सरकार ने महापौर व और तीन पार्षदों को निलंबित कर दिया।
-इसी दिन सरकार ने इन सभी के खिलाफ न्यायिक जांच शुरू करवा दी।
-7 जून को राज्य सरकार ने एक आदेश जारी करते हुए पार्षद शील धाभाई के कार्यवाहक महापौर बनाया।
-सौम्या गुर्जर ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन 28 जून को हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश पर स्टे से मना कर दिया।
-जुलाई में सौम्या गुर्जर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर स्टे की मांग की।
-1 फरवरी 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने निलंबन ऑर्डर को स्टे दे दिया और 2 फरवरी को सौम्या गुर्जर ने वापस मेयर की कुर्सी संभाली।
-11 अगस्त 2022 को सौम्या और 3 अन्य पार्षदों के खिलाफ न्यायिक जांच की रिपोर्ट आई, जिसमें सभी को दोषी माना गया।
-22 अगस्त को सरकार ने तीनों पार्षदों को बर्खास्त कर दिया।
-इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर न्यायिक जांच की रिपोर्ट पेश की।
-23 सितम्बर को सुप्रीम कोर्ट से मिले आदेश के बाद सौम्या गुर्जर पर कार्रवाई की गई है।