
राजस्थान में नए सत्र (2026-27) के लिए RTE के तहत प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, लेकिन इससे ठीक पहले प्रदेश की सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर सीधा प्रहार किया है। गहलोत का आरोप है कि भाजपा सरकार पिछले सत्रों की फीस का पुनर्भरण (Reimbursement) करने में विफल रही है, जिसके चलते निजी स्कूलों ने नए प्रवेश रोकने की चेतावनी दी है।
गहलोत ने दावा किया कि कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों की फीस का लगभग 900 करोड़ रुपये का भुगतान सरकार की ओर से बकाया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धि गिनाते हुए कहा कि कांग्रेस शासन में RTE का दायरा कक्षा 9 से 12 तक के लिए बढ़ाकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया था, ताकि गरीब बच्चों की पढ़ाई बीच में न छूटे। लेकिन वर्तमान सरकार पुराने बकाया को चुकाने में भी अक्षम साबित हो रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी के "2 साल बनाम 5 साल" के सुशासन के दावों की पोल खुल गई है।
शिक्षा विभाग ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए आवेदन की तारीख 20 फरवरी से 4 मार्च तय की है, जिसकी लॉटरी 6 मार्च को निकलनी है।
राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में पेश किए गए आंकड़ों और मुख्यमंत्री के भाषणों पर कटाक्ष करते हुए गहलोत ने कहा कि जो सरकार बच्चों की फीस नहीं भर सकती, उसके विकास के दावे खोखले हैं। उन्होंने आग्रह किया कि एप्रोप्रिएशन बिल में इस समस्या का समाधान निकाला जाए।
निजी विद्यालय संगठनों का तर्क है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 और हाईकोर्ट के आदेशों की सही व्याख्या नहीं की जा रही। उनका कहना है कि प्रवेश केवल एंट्री लेवल कक्षा में ही होना चाहिए, जबकि हालिया दिशा-निर्देशों में चार कक्षाओं में प्रवेश का प्रावधान दर्शाया गया है। पुनर्भरण की समय-सीमा तय नहीं है।
स्कूलों का आरोप है कि प्रति छात्र करीब 13 हजार रुपए की तय राशि वर्षों से समय पर नहीं मिलती, जबकि सरकारी स्कूलों पर प्रति छात्र खर्च कहीं अधिक है। बकाया भुगतान करोड़ों में बताया जा रहा है। निजी स्कूलों ने मांग रखी है कि हाईकोर्ट के आदेशों की स्पष्टता जारी की जाए। भुगतान की पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था अधिसूचित हो तथा लंबित बकाया तुरंत चुकाया जाए। अन्यथा वे आरटीई के तहत प्रवेश देने में असमर्थ रहेंगे।
हर साल की तरह इस बार भी आरटीई प्रक्रिया की शुरुआत से पहले खड़ा हुआ यह टकराव बच्चों के भविष्य पर सवाल खड़े कर रहा है। यदि सरकार और स्कूल प्रबंधन के बीच जल्द समाधान नहीं निकला तो हजारों जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई फिर अधर में लटक सकती है।
Updated on:
20 Feb 2026, 1:05 PM IST
Published on:
20 Feb 2026, 1:05 PM IST
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