
विकास जैन
कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं को पार्टी में अधिक तवज्जो देना और पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा भाजपा के लिए भारी पड़ती नजर आ रही है। जयपुर लोकसभा सीट पर मतदान प्रतिशत में 4.5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट पर शहर के वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि भाजपा में शामिल होने वाले कांग्रेसियों को जरूरत से ज्यादा महत्व देकर पार्टी के पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा है। इस पीड़ा के चलते अधिकांश कार्यकर्ता लोकसभा चुनाव में रस्म अदायगी के लिए ही प्रत्याशियों के साथ घूमे और बूथ मैनेजमेंट में सक्रिय भूमिका नहीं निभाई। कार्यकर्ताओं के अनुसार इस बार बूथ स्तर पर पन्ना प्रमुखों की भूमिका भी पहले जैसी सक्रिय नहीं रही। जबकि संगठन ने पन्ना प्रमुखों का जोर-शोर से प्रचार किया था। पार्टी में सबसे निचले स्तर की कड़ी में पन्ना प्रमुख का कार्य सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
यह होते हैं पन्ना प्रमुख: हर बूथ की मतदाता सूची के प्रत्येक पन्ने के हिसाब से करीब 60 मतदाताओं पर एक प्रमुख नियुक्त किया जाता है। जिनकी जिम्मेदारी मतदाताओं से निरंतर संपर्क की होती है। बूथ प्रभारी और बूथ समितियां और विस्तारक भी पन्ना प्रमुखों के साथ कार्य करते हैं। इसके बाद मंडल और जिला स्तर तक सक्रिय संगठन बना हुआ है। जयपुर लोकसभा सीट पर इस समय आठ विधानसभा क्षेत्र और करीब 22 लाख मतदाता हैं।
एक कार्यकर्ता ने कहा कि जयपुर के कुछ विधायक बड़े पदों पर हैं। उनकी जिम्मेदारी पूरे राजस्थान में प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार करने की है। लेकिन उनके विधानसभा क्षेत्र में पुरानी कोर टीम को जिम्मेदार न देना भी, इस बार मतदान प्रतिशत गिरने का एक कारण है। विशेष पदाधिकारी सही तरीके से काम नहीं कर रहे। जो वातावरण अब बन रहा है, उस पर ध्यान नहीं दिया तो मुश्किल होती जाएगी। सही आंकलन नहीं किया तो कार्यकर्ताओं में भी निराशा का भाव आ जाएगा।
जयपुर लोकसभा सीट भाजपा का परंपरागत गढ़ है। बीते दो चुनाव से कांग्रेस को बड़ी हार मिली। गत चुनाव में तो कांग्रेस प्रत्याशी की 4 लाख से अधिक मतों से हार हुई। ऐसे में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे कमजोर सीट मानकर ज्यादा मेहनत नहीं की। एक कार्यकर्ता ने कहा कि जयपुर सीट पर पार्टी कुछ मेहनत करके उलटफेर कर सकती थी।
Published on:
24 Apr 2024 12:21 pm
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