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राजस्थान की शहरी संपत्तियों के पट्टा नियमों में पहली बार बड़ा बदलाव: रजिस्ट्री के बाद मिलेगा फोटोयुक्त नया पट्टा

Rajasthan News: शहरी संपत्तियों के पट्टा नियमों में बड़ा बदलाव हुआ है। अब रजिस्ट्री के बाद खरीदार को पुराने मालिक के नाम वाला पट्टा नहीं, बल्कि अपने नाम और फोटोयुक्त नया पट्टा मिलेगा।
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Patta-Registry

फोटो: AI जनरेटेड

Rajasthan Lease Rules Big Change: राजस्थान की शहरी संपत्तियों के पट्टा नियमों में पहली बार बड़ा बदलाव किया गया है। अब यदि किसी भूखंड या मकान की रजिस्ट्री के जरिए खरीद होती है और उस संपत्ति का पहले से पट्टा बना हुआ है, तो नए खरीदार को अपने नाम और फोटो वाला नया पट्टा मिलेगा। इस व्यवस्था से संपत्ति के स्वामित्व का रिकॉर्ड अधिक स्पष्ट और अद्यतन रहेगा, जिससे भविष्य में दस्तावेजों से जुड़े विवाद कम होने की संभावना है। अभी तक ऐसी स्थिति में केवल नामांतरण होता था और खरीदार को पुराने मालिक के नाम वाला पट्टा ही रखना पड़ता था। नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।

नए नियम के अनुसार, खरीदार निर्धारित शुल्क जमा कर नया पट्टा बनवा सकेगा। आवासीय संपत्ति के लिए 10 रुपए प्रति वर्गमीटर और गैर-आवासीय संपत्ति के लिए 20 रुपए प्रति वर्गमीटर शुल्क तय किया गया है। ये शुल्क जमा करने के बाद संबंधित निकाय निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर नए नाम से पट्टा जारी करेगा। यह सुविधा फ्री होल्ड और लीज होल्ड, दोनों प्रकार की संपत्तियों पर लागू होगी। इस बदलाव से संपत्ति खरीदारों को बैंक से लोन लेने, दस्तावेज जमा करने और अन्य सरकारी कामों में आसानी होगी।

साथ ही विभिन्न विभागों में अलग-अलग दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता भी कम होगी। नामांतरण के साथ ही उपविभाजन पर अलग-अलग, पुनर्गठन पर संयुक्त और भू-उपयोग परिवर्तन के मामलों में भी नए पट्टे जारी किए जाएंगे।

फ्री होल्ड पट्टा लेने की प्रक्रिया हुई आसान

पुराने शहरों में धारा 69-ए के तहत अब फ्री होल्ड पट्टा जारी करने की प्रक्रिया भी स्पष्ट कर दी गई है। यदि आवेदन करने वाला व्यक्ति मूल पट्टाधारी है या उसकी मृत्यु के बाद सभी वारिस संयुक्त रूप से आवेदन करते हैं, तो मूल पट्टा जमा करने पर नया फ्री होल्ड पट्टा जारी कर दिया जाएगा। इससे वारिसों को स्वामित्व संबंधी प्रक्रिया पूरी करने में पहले की तुलना में अधिक सुविधा मिलेगी।

वहीं यदि संपत्ति किसी खरीदार के नाम हस्तांतरित हो चुकी है, तो उसे निर्धारित शुल्क के साथ मूल पट्टा और स्वामित्व संबंधी दस्तावेज जमा करने होंगे। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद नियमानुसार नए खरीदार के नाम से फ्रीहोल्ड पट्टा जारी किया जाएगा, जिससे अभिलेखों में स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट बनी रहेगी।