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दुनियाभर में जमाई धाक, पर अपने ही घर में बेगानों जैसा व्यवहार

राजस्थान के कुटीर उद्योग हाशिए पर

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jaipur

दुनियाभर में जमाई धाक, पर अपने ही घर में बेगानों जैसा व्यवहार

अश्विनी भदौरिया/जयपुर. राजस्थान के जेम्स ज्वेलरी, मीनाकारी, जयपुरी रजाई, कालीन, हेण्डीक्राफ्ट, मूर्तिकला सहित कई उद्योगों की दुनिया में पहचान है, लेकिन सरकारी नीतियों के कारण पनप नहीं पा रहे हंै। इनमें से जेम्स ज्वेलरी कारोबारी केन्द्र सरकार की नीति के कारण पहले प्रभावित रहा। इसी तरह अधिकारियों की गलती से जयपुरी रजाई, मूर्तिकला सहित कारोबार जीएसटी की मार का शिकार हुए। प्रदेश की मार्बल,कोटा स्टोन, करौली स्टोन और धौलपुर स्टोन के लिए भी पहचान है, लेकिन उसके लिए भी टैक्स और सुविधाओं को लेकर परेशानी रही है।

गुलाबी नगरी को देश-दुनिया में पहचान दिलाने वाली कुंदन-मीना, जेम्स का पारम्परिक कारोबार है। जयपुर स्थित गोपाल जी का रास्ते में इस कला के कारीगर अधिक हैं। तीन दशक से मोती का काम कर रहे पंकज सौंखिया कहते हैं कि पहले इस कला की कद्र थी, अब तो सब चाइना निर्मित माल के पीछे पड़े हैं। कई दुकानदार चाइना मेड माल को जयपुर ज्वैलरी बताकर बेच देते हैं। इसी तरह पर्यटन सीजन में जयपुरी रजाई विदेशियों की पसंद रहती है। व्यापारियों की मांग है कि जयपुरी रजाई को जीएसटी के 5 फीसदी वाले स्लैब में लाया जाए। इसके अलावा ई वे बिल से राहत, ट्रांसपोर्ट सुगम भी करना चाहिए।

जयपुरी रजाई
- मात्र 250 ग्राम रुई से बनती है
- हल्की होने के कारण मांग अधिक
- 200 से अधिक कारोबारी
- 20 करोड़ रुपए का कारोबार
सरकार इस व्यापार को प्रोत्साहित करे, तब ही मजदूर मिल पाएंगे।
हरिओम लश्करी, अध्यक्ष, जयपुर रजाई संघ समिति

कुंदन—मीना व जेम्स कारोबार
- जयपुर का यह पारम्परिक कारोबार माना जाता है। जयपुर से दुनियाभर में एक्सपोर्ट होती है ज्वैलरी, आर्टिफिशल ज्वैलरी पर तीन प्रतिशत जीएसटी
- कारोबार में 10 हजार से अधिक कारीगर-दुकानदार

ब्लू पॉटरी
- यह कला ईरान से जयपुर पहुंची
- कला लुप्त होने के कगार पर, बमुश्किल 50 लोग ही बचे हैं
- जीएसटी 12 फीसदी होने से बिक्री प्रभावित
- 100 से अधिक तरह के उत्पाद उपलब्ध

सांगानेरी प्रिंट
- ब्लॉक प्रिंटिंग हाथ से छपाई के कारण महंगी
- स्क्रीन प्रिंटिंग सस्ती होने के कारण सांगानेरी प्रिंट को चुनौती
- ब्लॉक प्रिंटिंग के हैंडीक्राफ्ट सामान पर 5 से 12 फीसदी जीएसटी
- एक लाख को रोजगार
- 1000 घरों में हो रहा हाथ से छपाई का काम
- 25 फीसदी विदेशी सैलानियों की पसंद

क्या करे सरकार
- पहले कुटीर उद्योग में रिजर्व कैटेगरी थी, जिसमें 140 उत्पाद शामिल थे
- इन उत्पादों को मशीन से बनाने की छूट नहीं थी।
- करीब दो साल रिजर्व कैटेगरी खत्म कर दी गई।
- सरकार को इस तरह की कैटेगरी फिर बनाने की जरूरत है।
- चाइनीज सामान पर प्रतिबंध लगाए और छोटे उद्योगों को बढ़ावा दे।

गुजरात एक मॉडल
लघु और कुटीर उद्योग को गुजरात में अधिक प्रोत्साहन दिया गया है। इससे रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। कपड़ा के अलावा दवाइयों और जरी उद्योग का भी गुजरात में बड़ा काम है। सूरत ने जरी उद्योग को नई पहचान दी है।
एन के जैन, चेयरमैन, एम्प्लोयर एसोसिएशन ऑफ राजस्थान