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आदर्श क्रेडिट सोसायटी में अरबों का घोटला उजागर, तीन डायरेक्टर सहित 11 गिरफ्तार

जयपुर, सिरोही, गुडग़ांव, मुंबई और अहमदाबाद सहित अन्य जिलों में 187 फर्जी कंपनियां बनाकर किया घोटाला

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आदर्श क्रेडिट सोसायटी में अरबों का घोटला उजागर, तीन डायरेक्टर सहित 11 गिरफ्तार

धीरेन्द्र भट्टाचार्य / जयपुर। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी में 14 हजार 800 करोड़ रुपए का घोटला उजागर कर कंपनी के तीन डायरेक्टर भाई, बेटी, बेटा और दामाद सहित 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एसओजी ने गिरफ्तार तीनों भाइयों की पत्नियों को भी जांच के दायरे में लिया है। सोसायटी ने देशभर में 28 राज्यों और 4 केंद्रशासित प्रदेशों में 806 शाखाएं हैं, जिसमें 309 शाखाएं राजस्थान में है। सोसायटी में करीब बीस लाख सदस्य हैं।

आरोपियों ने जयपुर, सिरोही, गुडग़ांव, मुंबई और अहमदाबाद सहित अन्य जिलों में 187 फर्जी कंपनियां बनाकर इतने बड़े घोटाले को अंजाम दिया है। एसओजी का कहना है कि मोदी बदर्स के परिजनों ने घोटाले की राशि से ही यहां शिप्रापथ, अजमेर रोड और भांकरोटा में 25-25 मंजिल की तीन बड़ी-बड़ी इमरातें भी खड़ी कर ली है।

महानिदेशक (एटीएस-एसओजी) डा. भूपेंद्र सिंह यादव ने बताया कि अरबों रुपए की इस घोटाले के मामले में जयपुर, सिरोही, गुडग़ांव, मुंबई और अहमदाबाद से सोसायटी के कर्ताधर्ता वीरेंद्र मोदी और उसके भाई भरत मोदी के अलावा इस परिवार की बेटी प्रियंका मोदी, दामाद वैभव लोढ़ा, भतीजा समीर मोदी सहित कमलेश चौधरी, ईश्वर सिंह, भरत वैष्णव, ललिता राजपुरोहित और विवेक पुरोहित को गिरफ्तार किया गया है। डा. यादव ने बताया कि गिरफ्तार वीरेंद्र और भरत का भाई मुकेश मोदी और बेटा रोहित मोदी को सीरियस फ्रॉड इवेंस्टिगेशनशैल (एसएफआईओ) ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया है, जिसके चलते अब इन दोनों आरोपियों को भी एसओजी अब प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार करके लाएगी। गिरफ्तार वीरेंद्र मोदी सिरोह में नगरपालिका का पूर्व चेयरमैन है।

फर्जी कंपनियों की आड़ में किया घोटाला
एसओजी के डीआईजी डा. नितिन दीप ने बताया कि मुख्य आरोपी मुकेश, उसके दोनों भाई और रिश्तेदारों ने 187 फर्जी कंपनियों की आड़ में इस घोटला अंजाम दिया है। इनमें गुडग़ांव की एक फर्म के नाम-पतों पर ही 125 कंपनियां बना ली गई, जिनकी आड़ और फर्जी दस्तावेजों से सोसायटी के कर्ता-धर्ताओं ने 14 हजार 800 करोड़ रुपए का घोटला कर रकम को आपस में बांट लिया। सोसायटी मूल रकम के करोड़ों रुपए की ब्याज की राशि को भी अपने खाताधारको को बांटने के बजाय फर्जी दस्तावेजों से खुद ने ही हड़प लिए।