
अश्विनी भदौरिया
Jaipur News : राजस्थान में प्रधान महालेखाकार ने जेडीए के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। कच्ची बस्तियों में विकास के लिए बेसिक सर्विसेज टू द पुअर (बीएसयूपी) फंड के करीब 100 करोड़ रुपए जेडीए ने दूसरे कार्यों पर खर्च कर दिए। इतना ही नहीं, जेडीए ने नगर निगम को भी भूखंड बेचने के बदले में 15 फीसदी राशि का भुगतान नहीं किया। हैरानी की बात यह है कि जेडीए के खाते में पैसे बने रहे और लोन लेकर ब्याज चुकाया। जेडीए की अनियमितताओं को लेकर प्रधान महालेखाकार ने एक विस्तृत रिपोर्ट वित्त विभाग, नगरीय विकास एवं आवासन विभाग को भेजकर जवाब मांगा है। हालांकि, अब तक कोई जवाब नहीं आया है। जबकि, रिपोर्ट भेजे एक माह से अधिक का समय हो चुका है।
जेडीए ने बैंक खातों में अत्यधिक राशि जमा होने के बाद भी विभिन्न वित्तीय संस्थाओं से लोन लिया। जमा राशि पर वर्ष 2023-24 में जेडीए को 50 करोड़ रुपए का ब्याज मिला। लेकिन जेडीए ने वित्तीय संस्थाओं को लोन के रूप में करीब 72 करोड़ रुपए ब्याज का भुगतान कर दिया।
जेडीए ने नगर निगम को भी भूखंड बेचने के बाद 15 फीसदी राशि नहीं दी। रिपोर्ट में लिखा है कि पांच वर्ष में जेडीए ने 3500 करोड़ रुपए की भूमि बेची। इन वर्षों में निगम को केवल 57 करोड़ रुपए ही दिए। जबकि, 467 करोड़ रुपए मिले ही नहीं। ऐसे में नगर निगम कॉलोनियों में विकास कार्य नहीं करवाया पाया।
जेडीए ने लोन लेकर वार्डों में विकास करवाए हैं। ग्रेटर ने 100 करोड़ और हैरिटेज ने 75 करोड़ का लोन लिया।
लीज राशि का 60 प्रतिशत राज्य सरकार के राजस्व में जमा करवाने की बजाय जेडीए ने 464 करोड़ रुपए अपने काम में ले लिए।
Published on:
25 Mar 2025 07:59 am

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