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राजस्थान की ये बेटी भारत-पाक सीमा पर दुश्मनों से ले रही है लोहा, सरहदी गांवों में…

तनुश्री पारीख ने बीएसएफ अकैडमी के 40वें बैच में 52 हफ्तों की ट्रेनिंग ली। जिसके बाद उन्हें पंजाब में भारत-पाकिस्तान सीमा पर पोस्टिंग मिली।

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जयपुर

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Punit Kumar

Sep 23, 2017

tanushree parikh

देश की महिलाओं ने कई मौकों इस पुरुष समाज में खुद को साबित किया है। अब महिलाएं केवल घरों तक सीमित ना रहकर पुरुषों के साथ हर मौर्चे पर चुनौती देती हुई नजर भी आती हैं। इन्हीं महिलाओं में से एक नाम है तनुश्री पारीख। राजस्थान की तनुश्री ने बीएसएफ के 40 साल के इतिहास में पहली महिला असिस्टैंट कमांडेंट बनने का गौरव प्राप्त किया है।

राजस्थान में पाकिस्तान की सीमा से लगे बाड़मेर में ड्यूटी पर तैनात बीएसएफ कमांडेंट तनुश्री अपनी ड्यूटी के साथ-साथ कैमल सफारी के जरिए बीएसएफ और भारीतय वायुसेना के महिला जवानों के साथ मिलकर नारी सशक्तिकरण और बेटी बचाओ का संदेश भी लोगों को दे रही हैं। तनुश्री साल 2014 में यूपीएससी असिस्टैंट कमांडेंट की परीक्षा पास करने के बाद बीएसएफ अधिकारी बनी। 2014 बैच की महिला अधिकारी तनुश्री ने इसके बाद टेकनपुर स्थित सुरक्षा बल अकादमी में आयोजित पासिंग आउट परेड में देश की पहली महिला के तौर पर हिस्सा लेते हुए 67 अधिकारियों के दीक्षांत समारोह में परेड का नेतृत्व भी किया। जिसके लिए उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है।

तनुश्री पारीख ने बीएसएफ अकैडमी के 40वें बैच में 52 हफ्तों की ट्रेनिंग ली। जिसके बाद उन्हें पंजाब में भारत-पाकिस्तान सीमा पर पोस्टिंग मिली। वहीं बीएसएफ में भर्ती को लेकर उनका कहना है कि उन्होंने बचपन से सेना में जाने की सोच रखी थी। ये नौकरी उनके लिए एक पैशन की तरह है। इतना ही नहीं तनुश्री अपने स्कूल और कॉलेज के दिनों में एनसीसी की कैडर भी रह चुकी हैं। फिलहाल जिस बाड़मेर में वह ड्यूटी कर रही हैं, कभी वहां उनके पिता नौकरी करते थे। तनुश्री का कहना कि जब बीकानेर में फिल्म बॉर्डर की शूटिंग चल रही थी, तो हर दिन वह फिल्म की शूटिंग देखने जाती थी। और कहीं ना कहीं फिल्म से ही सेना में भर्ती होने की प्रेरणा मिली।

तनुश्री वर्तमान में बीएसएफ में कैमल सफारी का नेतृत्व कर रही हैं, साथ ही सीमा से लगे ग्रामीण इलाकों में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए महिला सशक्तिकरण और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश भी दे रही हैं। उनका कहना कि आज की लड़कियां खुद को सूरज की तेज धूप से बचे नहीं, बल्कि इसी धूप में तपकर खुद को साबित करें। और भविष्य में किसी पर निर्भर हुए बिना अपना एक मुकाम हासिल करें। साथ ही उनका कहना कि उन्हें इस बात का गर्व है कि वह भारतीय सेना में बौतर पहली महिला कॉम्बैट अधिकारी हैं।