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जयपुर ।
राजस्थान विश्वविद्यालय ने इस बार से प्रेक्टिकल के नंबर देने की व्यवस्था में बदलाव किया है। लेकिन यह बदलाव विश्वविद्यालय के लिए मुसीबत बन गया। जिस कारण से कई विभागों के विद्यार्थियों के नंबर गलत दर्ज हो गए या कही कही तो नंबर ही आॅनलाइन दर्ज नहीं हो पाए। ऐसा मामला विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा विभाग ही नहीं बल्कि पीजी के विज्ञान विषय से जुड़े कई विभागों में सामने आया है।
विश्वविद्यालय में प्रेक्टिकल परीक्षा लेने आने वाले शिक्षक को कागजों की शीट पर नम्बर देने की परम्परा को तो खत्म कर दिया गया और नई प्रक्रिया के तहत वीक्षक को परीक्षार्थियों के नम्बर आॅनलाइन प्रविष्ट करने थे। लेकिन आॅनलाइन नंबर प्रविष्ट करने में गफलत होने से कई विद्यार्थियों के नंबर गलत दर्ज हो गए। पेपर अधिक अंक का नंबर कम अंक से दिए आॅनलाइन सिस्टम से नंबर देने की व्यवस्था में कई खामियां निकलकर सामने आई। जिसमें कई विभागों में तो ऐसा हुआ। जहां पेपर तो अधिक अंक का था लेकिन वीक्षक ने नंबर कम अंक से दे दिए। जैसे प्रश्न पत्र तो 40 अंक का था और मूल्यांकन 20 अंक से ही कर नंबर दे दिए गए। ऐसे में विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम में परेशानी का सामना करना पड़ा।
यह है विश्वविद्यालय की नई व्यवस्था
राजस्थान विश्वविद्यालय नई प्रक्रिया के तहत अब प्रेक्टिकल लेने के तुरंत बाद ही वीक्षक को परीक्षार्थियों के नम्बर आॅनलाइन भेजने है। इससे पहले वीक्षक एक सादा कागज पर नम्बर लिख कर उन्हें शीट में चढ़ाता था जिसमें कई बार विद्यार्थी अपने नम्बर बदलवा लेते थे। लेकिन वीक्षक के नम्बरों में हेर फेर की शिकायत आने के बाद विश्वविद्यालय ने नई व्यवस्था शुरू की थी जिसके तहत वीक्षक को नम्बर आॅनलाइन प्रविष्ट करने है। इस व्यवस्था की खास बात यह होगी है कि एक बार नंबर आॅनलाइन अपलोड किए जाने के बाद इसमें कोई बदलाव भी नहीं किया जा सकेगा।
विश्वविद्यालय यह करेगा समाधान
हालांकि विश्वविद्यालय ने इस समस्या का समाधान निकाल लिया हैं। जिन विभागों के विद्यार्थियों के नंबरों में गफलत हुई है उनके नंबर बदलने के लिए अब विभागाध्यक्ष को कुलपति से अनुमति लेनी होगी और सॉफ्टवेयर कंपनी से कहकर फिर से वीक्षक के मोबाइल पर ओटीपी भेज कर नंबर शीट में बदलाव करना होगा।
Published on:
26 Sept 2018 11:35 am
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