
जया गुप्ता/जयपुर. चुनाव निपटते ही राजस्थान विश्वविद्यालय में भर्ती प्रकिया फिर से शुरू हो गई है। आगामी सप्ताह में असिस्टेंट रजिस्ट्रार के लिए विवि प्रशासन ने दस्तावेज सत्यापन व साक्षात्कार की तैयारी कर ली है। लेकिन, इस प्रकिया में इतनी जल्दबाजी की जा रही है कि सरकार प्रतिनिधि को शामिल करने का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। दरअसल, विवि में शिक्षक-अधिकारी सभी भर्तियों के बोर्ड में सरकारी प्रतिनिधि का होना आवश्यक है। वहीं, प्रदेश में हाल ही में नई सरकार का गठन हुआ है। अभी तक मंत्रिमंडल भी तय नहीं किया गया, सरकारी प्रतिनिधि तो दूर की बात है। ऐसे समय मेें विवि भर्ती प्रकिया में जल्दबाजी कर रहा है, जो कि विवि के आला अधिकारियों की मंशा पर भी सवाल खडे कर रहा है। उधर, विवि के शिक्षकों ने आनन-फानन में की जा रही प्रकिया को लेकर मुख्यमंत्री बनने जा रहे अशोक गहलोत को भी पत्र लिखा है। साथ ही चयन प्रकिया स्थगित करने की मांग की है।
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10 पदों पर होंगी भर्तियां
विवि में असिस्टेंट रजिस्ट्रार के दस पदों पर भर्तियां होनी हैं। इनमें से पांच अनारक्षित, एक महिला अनारक्षित वर्ग, दो पिछड़ा वर्ग, एक अजा व एक जजा वर्ग का पद है। इन पदों के लिए कुल 86 अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। इन सभी अभ्यर्थियों को समय व तारीख अनुसार 19 से 22 दिसम्बर के बीच बुलाया गया है। चयन कमेटी के पैनल में दो विशेषज्ञों के साथ सरकारी प्रतिनिधि, कुलपति का होना आवश्यक है। जानकारी के अनुसार कोरम पूरा हुए बगैर साक्षात्कार नहीं लिए जा सकते।
- विवि में नियुक्ति प्रक्रिया की आधिकारिक इकाई सिंडीकेट और चयन समितियों में भी शासकीय प्रतिनिधित्व जरुरी है। नई सरकार को अभी प्रतिनिधि के मनोनयन में कुछ समय लगेगा। ऐसी स्थिति में चयन प्रकिया को संचालन अनुचित है। यह प्रकिया फिलहाल स्थगित की जानी चाहिए।
- विनोद शर्मा, महासचिव, राजस्थान विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (रूटा)
Published on:
15 Dec 2018 08:52 pm
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