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विधान परिषद का विधानसभा में भवन तैयार, गठन का इंतजार

जवाब पूरी तरह संसद पर ही निर्भर

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विधान परिषद का विधानसभा में भवन तैयार, गठन का इंतजार

विधान परिषद का विधानसभा में भवन तैयार, गठन का इंतजार


जयपुर। विधान परिषद का गठन कब तक हो सकेगा, इसका जवाब पूरी तरह संसद पर ही निर्भर करेगा। हालांकि राजस्थान विधानसभा में विधान परिषद् का भवन जरूर बना हुआ है। मंत्रिमंडल ने तीसरी बार विधानसभा के प्रस्ताव के तहत विधान परिषद के गठन को सहमति दे दी है। अब राज्य सरकार सहमति पत्र को संसद की स्थाई समिति को भेजेगी। इसके बाद संसद ही परिषद के गठन को हरी झंडी देगी। राज्य सरकार को इसका इंतजार करना होगा। जानकारी के अनुसार नई विधानसभा में मुख्य भवन में, जहां विधायक बैठते हैं। उसके ऊपर ही विधान परिषद् सदस्यों के लिए भवन बना हुआ है, जहां लिफ्ट से जाया जा सकता है। चौथी मंजिल पर जाकर विधान परिषद् भवन में जाने का रास्ता बनाया गया है। यहां भवन तो तैयार है, लेकिन विधान परिषद् का गठन नहीं होने से फर्नीचर और अन्य सुविधाएं विकसित नहीं है। करीब २४० लोगों के बैठने की इस विधान परिषद् भवन में बैठने की व्यवस्था की जा सकती है।

चहेतों को मिल जाएगी जगह


यदि इस सरकार में ही विधान परिषद के गठन को मंजूरी मिल जाएगी, तो कांग्रेस को राहत मिलेगी। विधानस परिषद में करीब 66 सदस्य होना प्रस्तावित है। खींचतान और नाराजगी से जूझ रही कांग्रेस को विधान परिषद में जगह देकर अपने नेताओं को संतुष्ट करने का मौका मिल जाएगा। साथ ही, जो विधानसभा चुनाव हार गए हैं उनकी आस भी जाग उठेगी।

आसान नहीं गठन, प्रस्ताव केवल भुलावा-तिवाड़ी


संसदीय मामलों के जानकार और प्रदेश के पूर्व विधि मंत्री रह चुके भाजपा के वरिष्ठ नेता घनश्याम तिवाड़ी का कहना है कि विधान परिषद् का गठन आसान नहीं है। यह प्रस्ताव केवल भुलावा है। यदि केन्द्र सरकार प्रस्ताव स्वीकृत कर भी लेती है तो भी परिषद् के गठन में ढाई से तीन साल लग जाएंगे। तिवाड़ी ने मीडिया से कहा कि इस प्रकार का प्रस्ताव २०१२ में तत्कालीन गहलोत सरकार ने भेजा था। उस समय भी कुछ नहीं हुआ। वसुंधरा सरकार ने भी एेसा ही प्रस्ताव भेजा, लेकिन उसका भी कोई अंजाम सामने नहीं आया। गहलोत सरकार ने फिर से यह बात उठाई है, लेकिन इसका कोई सियासी फायदा प्रदेश की गहलोत सरकार को नहीं मिलेगा।