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Rajasthan Elections : राजस्थान युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए 22 दावेदार, मुकाबला दिलचस्प होने के आसार

Rajasthan Youth Congress Elections: राजस्थान युवा कांग्रेस के चुनाव के लिए प्रदेश, जिला, विधानसभा और ब्लॉक स्तर के विभिन्न पदों के लिए कुल 12,249 युवाओं ने नामांकन दाखिल किए हैं। प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए इस बार 22 दावेदार मैदान में हैं, जिससे मुकाबला दिलचस्प होने के आसार हैं।

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Rajasthan Youth Congress Elections president post 22 contenders match is expected to be interesting

फाइल फोटो पत्रिका

Rajasthan Youth Congress Elections : राजस्थान युवा कांग्रेस के चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। 21 मार्च से चल रही नामांकन प्रक्रिया बुधवार को समाप्त हो गई। अंतिम तिथि तक प्रदेश, जिला, विधानसभा और ब्लॉक स्तर के विभिन्न पदों के लिए कुल 12,249 युवाओं ने नामांकन दाखिल किए हैं। नामांकन से जुड़ी शिकायतें और शुल्क जमा कराने की प्रक्रिया गुरुवार शाम 5 बजे तक जारी रहेगी।

इसके बाद जांच प्रक्रिया पूरी कर वैध उम्मीदवारों की सूची जारी की जाएगी। राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए इस बार 22 दावेदार मैदान में हैं, जिससे मुकाबला दिलचस्प होने के आसार हैं।

चुनाव केवल प्रदेश स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि जिला, विधानसभा और ब्लॉक स्तरीय समितियों के लिए भी होंगे। अब मतदान प्रक्रिया जल्द शुरू होगी, जो करीब एक माह तक चलेगी। इसके बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे, जिससे संगठन में नई टीम का गठन होगा।

चुनाव में जीत के लिए दावेदारों ने हायर कीं एजेंसियां

वहीं दूसरी तरफ सूत्रों के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल मजबूत दावेदारों ने पेशेवर एजेंसियां हायर कर ली हैं। ये एजेंसियां चंडीगढ़, दिल्ली सहित अन्य शहरों की हैं। इन्हें 25 से 50 लाख रुपए तक का भुगतान किया जा रहा है। सदस्यता अभियान ही सबसे महंगा हिस्सा है, करीब 24 से 25 करोड़ रुपए केवल सदस्य बनाने पर खर्च होने का अनुमान है।

इसके अलावा चुनाव प्रबंधन और प्रचार का खर्च अलग है। प्रदेश अध्यक्ष पद के 4-5 दावेदारों के बीच मुकाबले में प्रत्येक का खर्च 6 से 10 करोड़ तक पहुंच सकता है।

तय समय से पहले चुनाव

युवा कांग्रेस में अध्यक्ष और दो कार्यकारी अध्यक्षों के बीच कामकाज को लेकर विवादों की खबरें लगातार आती रही हैं। इसी कारण इस बार चुनाव तय 2 साल के कार्यकाल से पहले कराए जा रहे हैं। पार्टी कार्यकारी अध्यक्ष की व्यवस्था खत्म करने की तैयारी में है, ताकि भविष्य में टकराव कम हो।

पिछले राजस्थान में हुए चुनाव में वोटों की जांच में गड़बड़ियां सामने आने के बाद कई वोट खारिज किए गए थे। इस बार दावेदार 6 से 7 लाख वोट हासिल करने के लिए जोड़-तोड़ में लगे हैं, ताकि वोट रद्द होने के बाद भी बढ़त बनाए रख सकें।