
ग्राफिक्स फोटो- शिरीष
Rajasthan Youth Congress Elections : राजस्थान में युवा कांग्रेस चुनाव ने सियासी हलचल तेज कर दी है। सदस्यता से लेकर वोटिंग तक पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने के बावजूद चुनाव ‘पावर और पैसे’ का खेल बनता नजर आ रहा है। 20 लाख सदस्य बनाने के लक्ष्य के बीच चुनावी खर्च 30 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे युवा राजनीति में पैसों के बढ़ते प्रभाव पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक सदस्य बनाने पर लगभग 120 रुपए खर्च होना बताया जा रहा है।
चुनाव में 400 ब्लॉक अध्यक्ष, 200 विधानसभा अध्यक्ष, 50 जिलाध्यक्ष, राजस्थान प्रदेश कार्यकारिणी और प्रदेश अध्यक्ष चुने जाएंगे। पूरी प्रक्रिया इंडियन यूथ कांग्रेस (आइवाइसी) के ऐप के जरिए होगी, जहां एक सदस्य अलग-अलग पदों के लिए वोट करेगा। वैसे तो बड़े नेताओं को चुनाव से दूर रखने का नियम है, लेकिन पर्दे के पीछे से उनकी सक्रियता साफ दिख रही है।
18 से 35 वर्ष तक के युवा ही चुनाव लड़ सकेंगे। मतदान के बाद शीर्ष 3 उम्मीदवारों को दिल्ली इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा, जहां से एक अध्यक्ष और दो उपाध्यक्ष चुने जाएंगे। 50 जिलों में से 6 जिलाध्यक्ष पद एससी-एसटी वर्ग के लिए आरक्षित रखे गए हैं।
प्रदेश युवा अध्यक्ष पद का चुनाव वही युवा लड़ सकेगा, जिसका नाम पार्टी की परफॉर्मेंस लिस्ट में होगा। इसे लेकर गुरुवार को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे बैठक करेंगे। बैठक के बाद सूची जारी होगी। दावेदार के लिए कम से कम 100 ब्लॉकों में अपने उम्मीदवार उतारना भी जरूरी है, जिससे संगठनात्मक पकड़ का आकलन हो सके।
सूत्रों के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल मजबूत दावेदारों ने पेशेवर एजेंसियां हायर कर ली हैं। ये एजेंसियां चंडीगढ़, दिल्ली सहित अन्य शहरों की हैं। इन्हें 25 से 50 लाख रुपए तक का भुगतान किया जा रहा है। सदस्यता अभियान ही सबसे महंगा हिस्सा है, करीब 24 से 25 करोड़ रुपए केवल सदस्य बनाने पर खर्च होने का अनुमान है।
इसके अलावा चुनाव प्रबंधन और प्रचार का खर्च अलग है। प्रदेश अध्यक्ष पद के 4-5 दावेदारों के बीच मुकाबले में प्रत्येक का खर्च 6 से 10 करोड़ तक पहुंच सकता है।
युवा कांग्रेस में अध्यक्ष और दो कार्यकारी अध्यक्षों के बीच कामकाज को लेकर विवादों की खबरें लगातार आती रही हैं। इसी कारण इस बार चुनाव तय 2 साल के कार्यकाल से पहले कराए जा रहे हैं। पार्टी कार्यकारी अध्यक्ष की व्यवस्था खत्म करने की तैयारी में है, ताकि भविष्य में टकराव कम हो।
पिछले चुनाव में वोटों की जांच में गड़बड़ियां सामने आने के बाद कई वोट खारिज किए गए थे। इस बार दावेदार 6 से 7 लाख वोट हासिल करने के लिए जोड़-तोड़ में लगे हैं, ताकि वोट रद्द होने के बाद भी बढ़त बनाए रख सकें।
लक्ष्य सदस्य : 20 लाख
प्रति सदस्य खर्च : 120 रुपए (औसत)
कुल अनुमानित खर्च : 30 करोड़ रुपए
सदस्यता पर खर्च : 24-25 करोड़ रुपए
पद : 400 ब्लॉक, 200 विधानसभा, 50 जिलाध्यक्ष
प्रदेश अध्यक्ष के दावेदार : 4-5
1-प्रति दावेदार खर्च : 6-10 करोड़ रुपए
2-एजेंसियों की फीस : 25-50 लाख रुपए।
Updated on:
26 Mar 2026 10:07 am
Published on:
26 Mar 2026 10:07 am
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