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राजस्थान के हर बाशिंदे की ‘मुराद’ होगी पूरी, लगने वाली है ‘आपणी’ भाषा पर संवैधानिक मान्यता की मुहर

सरकार वैसे तो 38 भाषाएं आठवीं अनुसूची में लाना चाहती हैं, लेकिन प्रधानमंत्री को बताया गया कि तीन भाषाएं ऐसी हैं जिन्हें देश के बाहर मान्यता मिली हुई है।

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Nakul Devarshi

Dec 12, 2016

राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में बहुत जल्द ही शामिल कर लिया जाएगा। भाजपा सांसद और दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा है कि राजस्थानी के साथ ही भोजपुरी भाषा को भी संवैधानिक भाषा बनाने का फैसला हो गया है। इसी के साथ ही भोटी (भूटान में बोली जाने वाली भाषा) को भी आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाएगा।

सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि सरकार ने इन तीनों भाषाओं को संवैधानिक दर्जा देने का फैसला कर लिया है। अब लोकसभा सत्र खत्म होने वाला है, इसलिए अगले सत्र में सरकार लोगों को यह तोहफा दे देगी।

तिवारी ने कहा कि वैसे तो सरकार 38 भाषाएं आठवीं अनुसूची में लाना चाहती हैं, लेकिन प्रधानमंत्री को बताया गया कि तीन भाषाएं ऐसी हैं जिन्हें देश के बाहर मान्यता मिली हुई है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भूटान यात्रा पर गए थे तो वहां उन्हें बताया गया कि भोटी भाषा आपके देश में भी बोली जाती है। इस पर उन्होंने और जानकारी चाही।

इसके बाद देखा गया कि राजस्थानी, भोजपुरी और भोटी देश के बाहर भी बोली जाती हैं। भोजपुरी सूरीनाम, मॉरिशस, त्रिनिदाद और फिजी की मान्यता प्राप्त भाषा है, जबकि राजस्थानी भाषा को नेपाल में मान्यता मिली हुई है।

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