
राजेंद्र मिर्धा अपहरण...पुलिस की मुखबिरी करने वाले को 28 वर्ष से इनाम का इंतजार
जयपुर. प्रदेश के बहुचर्चित राजेंद्र मिर्धा अपहरण (Rajendra Mirdha Kidnapping) के मुखबिर हनुमान शर्मा (Hanuman Sharma) (दूधवाला) को अब तक इनाम की दरकार है। जबकि, इनाम की घोषणा हुए 28 वर्ष बीत चुके हैं। इस दौरान कई सरकारें आईं और चली गईं। लेकिन, अब तक मुखबिरी के बदले मिलने वाली भूमि नहीं मिल पाई। इस जमीन के लिए हनुमान शर्मा जेडीए में कई चक्कर लगा चुके हैं। कई बार मुख्यमंत्री कार्यालय में जाकर अधिकारियों को अपनी पीड़ा बता चुके हैं। अब स्थिति यह है कि जेडीए में अधिकारी भी उनकी बातों पर ध्यान नहीं देते। पत्रिका से बातचीत में उन्होंने कहा कि आतंकियों की सूचना देने का सरकार ने ये कैसा इनाम दिया है। आवंटित भूमि को लेने के लिए जवानी से बुढ़ापा आ गया।
जो जमीन मिली वो मंडल ने अवाप्त की
हनुमान शर्मा ने बताया कि घोषणा के बाद ग्राम श्री गोविंदपुरा में जमीन मिली थी। लेकिन, उक्त जमीन को आवासन मंडल (Housing Board) ने अवाप्त कर लिया। इसके बाद से अब तक इसका मुआवजा जेडीए ने नहीं दिया है। उनकी मानें तो 700-700 वर्ग मीटर के दो भूखंड जेडीए को देने हैं। इन भूखंडों के लिए कई वर्ष से जेडीए में चक्कर लगा रहे हैं।
दी थी पुलिस को सूचनापूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामनिवास मिर्धा (Ex Minister and Congress Leader Ramniwas Mirdha) के बड़े बेटे राजेंद्र मिर्धा का 17 फरवरी 1995 को सी स्कीम स्थित मकान से अपहरण कर लिया था। बदले में दिल्ली में गिरफ्तार आतंकी देवेंद्र पाल भुल्लर (Terrorist Devendra Pal Bhullar) की रिहाई की मांग की गई थी। राज्य सरकार ने राजेंद्र मिर्धा का सुराग देने वाले को दो लाख रुपए देने की घोषणा की। 24 फरवरी को हनुमान शर्मा ने पुलिस को सूचना दी। हनुमान की सूचना पर पुलिस ने आतंकी नवनीत सिंह कादिया (Terrorist Navneet singh Kadia) को ढेर कर दिया था और मिर्धा को मुक्त कराया था।
जगतपुरा के खूसर योजना में पांच भूखंडों की सूची बनाकर हनुमान शर्मा को दी है, लेकिन वे यहां पर जमीन लेने को तैयार नहीं हैं। कागज भी उन्होंने पूरे नहीं दिए हैं। प्रार्थना पत्र देकर चले जाते हैं।
-जगत राजेश्वर, जोन उपायुक्त, जेडीए
Published on:
11 Mar 2023 01:26 pm
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