
rajasthan politics पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट कांग्रेस पार्टी से वर्षों पुराना नाता तोड़कर नई पार्टी गठन का ऐलान करेंगे या नहीं, ये आज साफ भी हो जाएगा और पिछले कुछ दिनों से चल रही तमाम तरह की अटकलों और चर्चाओं पर भी विराम लग जाएगा।
दरअसल, आज सचिन पायलट के पिता पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय राजेश पायलट की पुण्यतिथि है। इस अवसर पर दोसा स्थित गुर्जर छात्रावास परिसर में स्वर्गीय पायलट की प्रतिमा अनावरण और छात्रावास के नए भवन का शिलान्यास कार्यक्रम रखा गया है। इसी कार्यक्रम में पायलट की ओर से कोई बड़ा ऐलान करने को लेकर अटकलें और चर्चाओं का बाजार पिछले कुछ दिनों से गरमाया हुआ है। ऐसे में आज का ये कार्यक्रम संपन्न होने के साथ ही पायलट को लेकर लगाई जा रही है अटकलों पर भी ब्रेक लग जाएगा।
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बगावत करके नई पार्टी का नतीजा उत्तर-चढ़ाव जैसा
राजस्थान की राजनीति में ऐसा पहली बार नहीं होगा जब किसी प्रमुख राजनीतिक दल से कोई दिग्गज नेता पार्टी छोड़कर नई पार्टी के गठन का ऐलान करेगा इससे पहले भी कुछ दिग्गज नेताओं ने वर्षों तक पार्टी की सेवा करने के बाद नाता तोड़कर नई पार्टी बनाई थी लेकिन ऐसा कठोर निर्णय लेना उन नेताओं के लिए फायदेमंद साबित नहीं हुआ।
किरोड़ी लाल मीणा -
राज्यसभा सांसद डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने वर्ष 2008 में भाजपा का दामन छोड़ा था। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनावों से पहले डॉ. मीणा ने नेशनल पीपुल्स पार्टी के साथ अपनी नई पारी शुरु की। पार्टी का नेतृत्व करते हुए उन्होंने यहां कांग्रेस और बीजेपी को चुनौती दी।
एनपीपी के टिकट पर डॉ. किरोड़ीलाल मीणा स्वयं, उनकी पत्नी गोलमा देवी के अलावा गीता वर्मा और नवीन पिलानिया ने चुनाव जीता और विधायक बन गए। पांच साल तक डॉ. किरोड़ीलाल मीणा सहित अन्य नेता एनपीपी में रहे लेकिन बाद में स्थितियों को भांपते हुए डॉ. मीणा की घर वापसी हुई। वे फिर से भाजपा में शामिल हो गए। उनके साथ गोलमा देवी और गीता वर्मा भी बीजेपी में आ गईं।
घनश्याम तिवाड़ी
वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी से राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने भी वर्ष 2018 के चुनावों से पहले भारत वाहिनी पार्टी का गठन किया था। बगावत करने का कारण यह था कि वर्ष 2013 से 2018 तक के बीच वसुंधरा राजे के शासनकाल में उनका और राजे की आपस में नहीं बनी। दोनों एक दूसरे के धुर विरोधी रहे।
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पार्टी में रहते हुए तिवाड़ी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सरकारी बंगले के बाहर धरना भी दिया और बाद में भाजपा का साथ छोड़ने का बड़ा कदम भी उठाया। उन्होंने भारत वाहिनी पार्टी का गठन किया।
इस पार्टी का प्रदेशाध्यध तिवाड़ी ने अपने बेटे को बनाया था। तिवाड़ी स्वयं सांगानेर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे लेकिन उनकी जमानत जब्त हो गई। बाद में भारत वाहिनी पार्टी को छोड़कर कांग्रेस में चले गए और करीब सालभर तक रहने के बाद बीजेपी में शामिल हो गए। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा का टिकट देकर चुनाव लड़ाया और वे राज्यसभा सांसद बन गए।
हनुमान बेनीवाल -
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी से एकमात्र सांसद हनुमान बेनीवाल भी कभी बीजेपी में हुआ करते थे। लेकिन बीजेपी के साथ उनकी बात नहीं बनी तो अक्टूबर 2018 में उन्होंने जयपुर से हुंकार भरी और नई पार्टी का गठन किया।
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का झंडा लेकर बेनीवाल ने 2018 के विधानसभा चुनावों में ताल ठोकी और स्वयं के समेत कुल तीन विधायक बनाए। हालांकि वर्तमान में हनुमान बेनीवाल नागौर से लोकसभा सांसद हैं, और उनकी जगह उनके भाई नारायण बेनीवाल आरएलपी से ही विधायक हैं।
मांगे अनसुनी, नाराजगी बरकरार!
पायलट ने पहले अनशन और फिर अपनी अजमेर से जयपुर यात्रा के जरिए पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार के भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए। हालांकि भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी होने के बाद भी उनपर कार्रवाई नहीं करने पर अशोक गहलोत सरकार पर भी जमकर निशाना साधा। उधर, पायलट के करीबी नेताओं का यह भी कहना है कि 'वसुंधरा राजे सरकार में हुए भ्रष्टाचार' पर कार्रवाई करना प्रमुख मांग रही है लेकि इस पर अभी बहुत कुछ नहीं हो पाया है।
सब अफवाह, कहीं नहीं जा रहे पायलट: कांग्रेस
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पायलट की नई पार्टी को लेकर जारी तमाम अटकलों को खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि यह सब अफवाह है, पायलट पार्टी से बाहर नहीं जाएंगे और अपनी पार्टी नहीं बनाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पायलट के साथ कई बार बातचीत हुई है। कांग्रेस पार्टी राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 मिलकर एकजुट होकर लड़ेगी।
Published on:
11 Jun 2023 09:36 am
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