
Air pollution
जयपुर। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने जयपुर, जोधपुर, पाली और भिवाड़ी में प्रदूषण के स्तर को खतरनाक माना है। लेकिन राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल शहरों मे वायु प्रदूषण को लेकर बेपरवाह है। इसकी बानगी देखी जा सकती है, राजवायु और दृष्टि एप के मामले में। लोगों को शहर में वायु प्रदूषण की स्थिति बताने के लिए लॉन्च किए गए एप लम्बे अर्से से बंद पड़े हैं। लेकिन प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी इससे बेपरवाह बने हुए हैं।
आॅनलाइन डेटा हुआ बंद
प्रदेश के 8 प्रमुख शहरों में प्रदूषण की स्थिति को जानने के लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने राजवायु एप लॉन्च किया था। जबकि औद्योगिक इकाइयों के लिए दृष्टि एप लॉन्च किया गया था। राज्य के शहरों में 24 घंटे प्रदूषण की स्थिति का पता लगाने के लिए राजवायु एप को केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सिस्टम से आॅनलाइन जोड़ा गया था। ताकि शहरों में प्रदूषण के स्तर का पता चलते रहे और लोग सावधानी रख सके। जबकि दृष्टि एप प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों का प्रदूषण बताने के लिए लॉन्च हुआ था। राज्य की औद्योगिक इकाइयों को इस एप के साथ जोड़ा गया था। लेकिन दोनों ही एप कई महीनों से बंद पड़े हैं और स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अधिकारी बेपरवाह बने हुए हैं।
एप से जुड़े थे ये शहर
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के राजवायु एप से राजधानी जयपुर, जोधपुर, अजमेर, कोटा, उदयपुर, पाली, भिवाड़ी और अलवर को जोड़ा गया था। इन शहरों में नई तकनीक वाले पॉल्यूशन मीटर लगाकर उन्हें केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल (सीपीसीबी) के सर्वर से कनेक्ट किया गया था। सीपीसीबी के सर्वर से राजवायु एप पर इन 8 शहरों में प्रदूषण की स्थिति का 24 घंटे लगातार पता चलता रहता है। लेकिन एप बंद होने से अब ये पता नहीं चल पा रहा कि प्रदेश के किस शहर में कितना प्रदूषण है।
अति खतरनाक स्तर तक पहुंचा था प्रदूषण
प्रदेश में जयपुर, भिवाड़ी, पाली और जोधपुर ऐसे शहर हैं, जहां पर प्रदूषण का स्तर अक्सर 300 एक्सयूआइ के स्तर को पार कर जाता है। हवा में प्रति घनमीटर जब 2.5 साइज के पार्टिकुलेट मैटर्स की संख्या 300 के स्तर को पार कर जाती है तो उसे खतरनाक श्रेणी में माना जाता है। जबकि भिवाड़ी में तो कई बार ऐसे मौके आए हैं जब एक्यूआई का स्तर 426 तक पहुंच चुका है। जबकि जयपुर में एक्यूआइ का लेवल 340 तक कई बार पहुंचा है। ऐसी ही स्थिति पाली और जोधपुर की रहती है। जब प्रदूषण का स्तर खतरनाक श्रेणी में पहुंच जाता है तो श्वास रोग से पीड़ित लोगों और बच्चों को सावधानी बरतनी होती है, राजवायु एप पर सावधानियों के बारे में जानकारी उपलब्ध रहती थी। अब एप पर प्रदूषण के स्तर का ही पता नहीं चल पा रहा तो लोग सावधानी कैसे बरतें।
क्या बोले जिम्मेदार -
राजवायु और दृष्टि एप काम कर रहे हैं या नहीं इसके बारे में पता नहीं है। अभी टेक्निकल टीम से पता करके एप में डेटा कनेक्ट करेंगे।
भुवनेश माथुर, एग्जिक्टिव इंजीनियर, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, जयपुर
Updated on:
07 Sept 2019 12:35 pm
Published on:
06 Sept 2019 10:28 am
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