
भाई-बहन के प्रेम के बीच से हटी सलाखों की दीवार
जयपुर. सेंट्रल जेल प्रशासन की ओर से रक्षाबंधन के मौके पर कैदियों की बहनों को अनोखा तोहफा दिया गया। इस बार रक्षाबंधन पर भाई-बहन के बीच की सलाखों की दीवार को हटा दिया गया। बहनों ने न केवल भाईयों की कलाईयों पर राखी बांध उनके रिहा होने की दुआ मांगी, बल्कि गले मिलकर अपने दर्द को भी बांटा। अपने कैदी भाईयों के साथ त्योहार मनाने के लिए हजारों की संख्या में बहनें पहुंची। भाईयों से मिलने का सिलसिला सुबह आठ बजे से शुरु हुआ और पांच बजे तक चला।
इस बार यह व्यवस्था
जेल अधीक्षक संजय यादव ने बताया कि इस बार व्यवस्था में बदलाव किए गए। बहनों को भाईयों से मिलाने के लिए ड्रामा हॉल में रक्षाबंधन का कार्यक्रम रखा गया। हॉल में एक बार में ६० कैदियों को पंक्ति में बैठाकर बहनों से मिलवाया गया। इस दौरान बहनों के लिए शरबत की व्यवस्था की गई। व्यवस्था में बदलाव के साथ सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान रखा गया। तीन बार चैकिंग के बाद ही बहनों को राखी और मिठाई के साथ ही अंदर जाने दिया गया।
भाईयों ने अपराध छोडऩे का किया वादा
नम आंखों से जहां बहनों ने भाईयों के राखी बांधी वहीं, भाईयों ने दोबारा अपराध नहीं करने का वादा बहनों से किया। भाईयों ने कहा कि उनसे गलती जो अपराध हुआ उसकी सजा उनकी बहनों को भी मिल रही है, क्योंकि उनकी वजह से ही उन्हें जेल में त्योहार मनाना पड़ रहा है। कैदियों ने तोहफे में बहनों को वादा किया कि अब वो कभी दोबारा अपराध नहीं करेंगे कि उनकी वजह से जेल के भीतर बहनों को रक्षाबंधन मनाना पड़े।
आंखे हुई पुलिसकर्मियों की भी आंखे हुई नम
हर बहने कैंदियों को सलाखों के पीछे से राखी बांधती थी। लेकिन गले मिलते ही फूट पड़ा दुख
बहनें जैसे ही राखी बांधने के लिए जेल पहुंची भाईयों का दर्द फूट पड़ा। गले मिलकर जहां भाई-बहनों ने एक-दूसरे को हिम्मत बंधा रहे थे। इस मौके पर बहनों के दर्द को देखकर पुलिसकर्मियों के भी आंखे भर आई।
Published on:
26 Aug 2018 08:28 pm
