कला एवं संस्कृति विभाग और जवाहर लाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी के सहयोग से और रंग मस्ताने की ओर से आयोजित किए जा रहे’रंग राजस्थान’ के सांतवें दिन की शुरुआत जवाहर कला केंद्र में सुबह 10 बजे फिल्म निर्देशक और लेखक आकर्ष खुराना की मास्टर क्लास से हुई। 35 लोगों की इस क्लास में रंगमंच के सफर और फिल्मों में आसानी से काम मिलने पर खूब सारी बातें हुई और प्रश्न उत्तर का एक सेशन रहा। जिसमें सभी ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया।
इसके बाद 11 बजे से शिल्पकार हंसराज चित्रा भूमि की जवाहर लाल नेहरू बाल साहित्य स्कूल आउट रीच प्रोग्राम रंग बचपन के तहत स्कल्पचर वर्कशॉप का आयोजन हुआ। जिसमें राजश्री कन्या विद्यालय की लगभग छात्राओं ने भाग लिया। इस वर्कशॉप में छात्राओं ने मिट्टी के साथ कई आकृतियां बनाईं।
यह भी पढ़ेें – Ravindra Manch पर नाटक ‘रसिक सम्पादक’ – आज भी नहीं बदली महिला के प्रति मानसिकता
फिर 12 बजे से जेकेके के कृष्णायन सभागार में स्टोरीटेलिंग का सत्र ‘रंग गाथा ‘रखा गया। जिसमें रंग राजस्थान महोत्सव के आयोजक अभिषेक मुद्गल, डिप्टी कमिश्नर नगर निगम शिप्रा शर्मा और माइम कलाकार विचित्र सिंह ने अपनी कहानियां सुनाईं। अभिषेक मुद्गल की कहानी से सभी दर्शक भावुक हो गए।
वहीं दोपहर दो बजे जेकेके की अलंकार आर्ट गैलेरी में’ रंग चौपाल’ में अतिथि के रूप में अभिनेता तारुक रैना, अभिषेक शाह और वृंदा कैकर उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन स्वप्निल जैन ने किया। जिसमें नेक्स्ट जेनरेशन ऑफ थिएटर पर बात हुई।
शाम को हुआ नाटकों का मंचन
जेकेके के कृष्णायन सभागार में 4 बजे विजय कुमार नायक निर्देशित नाटक ‘ताबूत जिंदगी’ का मंचन हुआ। जिसके लेखक कविंद्र फळदेसाई हैं। ताबूत जिंदगी एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो गोवा में अपने परिवार के साथ रहता है और ताबूत बनाने का काम करता है। उस व्यक्ति की एक खासियत है कि वह ताबूत बनाते समय गाने गाता है, उसकी यह बात उसकी पत्नी को पसंद नहीं आती क्योंकि किसी की मौत पर ताबूत बनाते वक्त गाना गाना अच्छा नहीं लगता। बस इसी कहानी के इर्द गिर्द ये नाटक चलता है। वहीं शाम सात बजे रंगायन सभागार में नाटक ‘देयर समथिंग इन द वाटर’ का लेखन और निर्देशन फिल्म निर्देशक और लेखक आकर्ष खुराना ने किया। ये नाटक दिल्ली के फ्रेंड सर्कल की एक कहानी है जिसका मुख्य किरदार एक डॉक्टर है। जिसके इर्दगिर्द पूरी कहानी घूमती है।