
प्रदेश में सिर्फ रणथम्भौर अभयारण्य में ही है यह जानवर, शुरू होगा कैरेकल ब्रीडिंग सेंटर
जयपुर। रणथम्भौर अभयारण्य (Ranthambore Sanctuary) में कैरेकल यानि सियागोश (Caracal means Siagosh) ब्रीडिंग सेंटर शुरू होगा। इसके लिए वन अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भिजवाए हैं। वनाधिकारियों ने बताया कि पांच से दस सियागोश की ब्रीडिंग कराई जाएगी। वर्तमान में रणथम्भौर में 35 से अधिक सियागोश हैं। कैरेकल मध्यम आकार की जंगली बिल्ली होती है। इसकी ऊंची छलांग लगाने की क्षमता काफी अधिक होती है। यह अधिकतर मिडिल ईस्ट, अफ्रीका, सेंट्रल एशिया के जंगलों में अधिक पाई जाती है।
वन विभाग की ओर से रणथम्भौर में 2020 में तत्कालीन सीसीएफ मनोज पाराशर व उपवन संरक्षक मुकेश सैनी ने कई माह तक विशेष अभियान चलाकर सियागोश को खोजा था। इसके लिए वन विभाग की ओर से रणथम्भौर के जंगल में 215 जगहों पर फोटो ट्रैप कैमरे लगाए गए थे। उस समय रणथम्भौर में करीब 35 सियागोश होने की पुष्टि वन विभाग की ओर से की गई थी। प्रदेश के अन्य किसी भी टाइगर रिजर्व या अभयारण्य में सियागोश नहीं है। ऐसे में इस दुर्लभ प्रजाति की बिल्ली के रणथम्भौर में इतनी संख्या में होना भी एक रिकॉर्ड माना जा रहा है। गौरतलब है कि रणथम्भौर में वर्तमान में 7 प्रजाति के वन बिलाव (वाइल्ड कैट) पाए जाते हैं।
Published on:
13 Jun 2023 10:21 pm
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