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चुनाव में हार का डर… अजमेर जेल में हिस्ट्रीशीटर ने बनाई पूर्व सरपंच की हत्या की प्लानिंग; पढ़ें सीकर के चर्चित हत्याकांड की पूरी कहानी

Sikar Sarpanch Murder Case: सीकर के चर्चित पूर्व सरपंच सरदार राव हत्याकांड में कोर्ट ने 9 साल बाद बड़ा फैसला सुनाते हुए 9 दोषियों को सजा दी है।

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Sikar Sarpanch Murder Case (2)

लॉरेंस बिश्नोई, सुभाष बराल और मृतक सरदार राव। फोटो: पत्रिका

सीकर। सीकर के चर्चित पूर्व सरपंच सरदार राव हत्याकांड में कोर्ट ने 9 साल बाद बड़ा फैसला सुनाते हुए 9 दोषियों को सजा दी है। एससी-एसटी कोर्ट की न्यायाधीश रेणुकासिंह हुड्डा ने सुपारी देने वाले मुख्य सूत्रधार व दो शूटरों सहित तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही सहयोगी 6 आरोपियों को 10-10 साल के कठोर करावास की सजा सुनाई है। हालांकि, कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और एक अन्य मुजरिम यतेंद्रसिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।

बता दें कि जुराठड़ा ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच सरदार राव हत्याकांड केस में राजनीतिक रंजिश के चलते 23 अगस्त 2017 में विरोधी ने शूटरों को हायर कर पलसाना कस्बे में एक किराने की दुकान में बैठे पूर्व सरपंच सरदार राव पर दिनदहाड़े गोलियां चलवाई थी। न्यायालय का फैसला 9 साल बाद आया है। मुजरिमों को कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायालय लाया गया और इसके बाद उन्हें सजा सुनाई गई।

इन आरोपियों को सुनाई सजा

पूर्व सरपंच की मुजरिम हत्या की साजिश रचने वाले हरदेवराम मूंड निवासी बराल और शूटर हरविंदरसिंह उर्फ मन्नू निवासी पंजाब व अरूण छुरीमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। अरूण छुरीमार के खिलाफ पंजाब में कई गंभीर मामले दर्ज हैं।

शूटरों को रैकी करने में मदद करने व होटल्स में ठहराने वाले छह मुजरिमों ओमप्रकाश मूंड, मुकेश कुमार, भानूप्रताप, सुनील, कुलदीप व नरेंद्र को 10-10 साल का कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।

पांच आरोपियों के खिलाफ जांच लंबित

एक शूटर अंकित भादू का पहले ही पंजाब के मोहाली में एनकाउंटर हो गया था। वहीं, संपत नेहरा और इस हत्याकांड के लिए गाड़ी व हथियार उपलब्ध करवाने वाला जग्गू भगवान पुरिया सहित कुल पांच आरोपियों के खिलाफ जांच लंबित है।

चुनाव में हार के डर के चलते मर्डर की प्लानिंग

2015 में पंचायतीराज चुनाव में सरकारी अध्यापक हरदेवाराम मूंड का बेटा संदीप सरपंच बने थे। सरकारी नौकरी लगने पर संदीप ने सरपंच पद से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में उप चुनाव सितंबर महीने में होना प्रस्तावित था। सरदार राव को दमदार प्रत्याशी माना जा रहा था, चुनाव में हार के डर के चलते अध्यापक हरदेवाराम मूंड ने अजमेर जेल में बंद अपने भतीजे हिस्ट्रीशीटर सुभाष बराल से बात कर पूरी प्लानिंग की। बराल ने पंजाब में अपने बदमाश साथियों के जरिए जेल से ही साजिश रचकर शूटरों को लालच देकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया था।

ये है पूरा मामला

चुनाव से पहले सरदार राव को रास्ते से हटाने के लिए अध्यापक हरदेवाराम मूंड ने जुलाई महीने में अजमेर जेल में बंद अपने भतीजे और आनंदपाल गैंग के सदस्य सुभाष बराल से फोन पर बात की थी। इसके बाद हिस्ट्रीशीटर सुभाष बराल ने लॉरेंस बिश्नोई से बात की और फिर 20 अगस्त 2017 को चार शूटर सीकर आए। जिनके होटल में रूकने की व्यवस्था ओमप्रकाश ने की थी। 20 अगस्त को चारों शूटर दादिया पहुंचे थे। शूटरों ने कई दिन तक सरदार राव की रेकी की।

इसके बाद 23 अगस्त को पलसाना कस्बे में एक किराने की दुकान में बैठे पूर्व सरपंच सरदार राव पर शूटरों ने दिनदहाड़े फायरिंग कर दी। राव की हत्या के बाद शूटर सीकर के जीणमाता इलाके में पहुंचे और फिर गाड़ी की नंबर प्लेट बदलकर जयपुर चले गए। रास्ते में शूटरों ने जेल में बद सुभाष बराल को कॉल किया। लेकिन, पुलिस से बचने के लिए उसने अपना मोबाइल तक जला दिया था।