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रणथंभौर : संघर्ष में बाघिन टी-114 की मौत, भूख से हुई शावक की मौत

Death Of Tiger : रणथम्भौर अभयारण्य (Ranthambore Sanctuary) से फिर बुरी खबर है। पिछले दिनों तीन शावकों के साथ नजर आई टी-114 और उसके एक शावक (CUB) की मौत हो गई है। दोनों के शव फलौदी रेंज के जंगल में मिले हैं। शावक का शव मंगलवार को सुबह 6 बजे नाहरी के नाले एनिकट में मिला। जबकि शाम को इस स्थान से 800 मीटर की दूरी पर बाघिन का शव भी वन विभाग की टीम ने कब्जे में ले लिया। बुधवार को बाघिन का पोस्टमार्टम किया जाएगा।

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फोरेंसिक जांच नहीं होने की आड़ में अब नहीं बचेंगे अपराधी

Death Of Tiger :रणथम्भौर अभयारण्य से फिर बुरी खबर है। पिछले दिनों तीन शावकों के साथ नजर आई टी-114 और उसके एक शावक की मौत हो गई है। दोनों के शव फलौदी रेंज के जंगल में मिले हैं। शावक का शव मंगलवार को सुबह 6 बजे नाहरी के नाले एनिकट में मिला। जबकि शाम को इस स्थान से 800 मीटर की दूरी पर बाघिन का शव भी वन विभाग की टीम ने कब्जे में ले लिया। बुधवार को बाघिन का पोस्टमार्टम किया जाएगा।

25 जनवरी को ही टी—114 शावकों के साथ दोलाड़ा गांव के एक खेत में दिखी थी। सूत्रों ने बताया कि इसके बाद से शावक तो लगातार दिख रहे थे, लेकिन टी-114 नजर नहीं आई। विभाग बाघिन को ट्रेस करने में भी विफल रहा। आम तौर पर बाघिन एक- दो दिनों में शावकों के पास लौट आती है। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं होने पर भी विभाग ने बाघिन के गायब होने की जानकारी सार्वजनिक नहीं की। 10 जनवरी को ही अभयारण्य में बाघ टी -57 की मौत भी हो गई थी।

संघर्ष में गई बाघिन की जान

सूत्रों ने बताया कि बाघिन के शरीर पर चोट के निशान दिखे हैं। किसी बाघ के साथ संघर्ष की आशंका जताई जा रही है। वन अधिकारियों का मानना है कि शावकों को बचाने में बाघिन का किसी बाघ के साथ सघर्ष हुआ। 26 जनवरी को इस इलाके में एक बाघ का मूवमेंट भी था।

सर्दी व भूख का शिकार हुआ शावक

इधर, शावक की मौत के पीछे सर्दी और भूख को प्रारंभिक कारण माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि करीब तीन माह का मृत शावक शारीरिक रूप से कमजोर था। पिछले दो दिनोंं से संभवत: वह अपनी मां के साथ नहीं था। ऐसे में भूख और तेज सर्दी नहीं सह सका।

बड़ा सवाल: जयपुर की बजाय कोटा क्यों भेजे शावक

वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि बाघिन के शेष दोनों जीवित शावकों को रणथम्भौर से कोटा के अभेड़ा जैविक उद्यान भेज दिया गया है। उन्हें जयपुर स्थित नाहरगढ़ जैविक उद्यान भेजना चाहिए था। शावकों के लिए यहां अलग से एनआइसीयू है। यह मनमानी है। रणथम्भौर के सीसीएफ सेडूराम यादव का कहना है कि दोनों शावकों को यहां संभालना मुश्किल था। अभेड़ा में देखभाल अच्छी हो जाएगा।

जिम्मेदार बोले... कारण अभी पता नहीं
बाघिन 114 तथा उसके एक शावक की मौत हुई है। सुबह शावक के शव की सूचना मिली और शाम को बाघिन का शव मिला। शावक का पोस्टमार्टम कराकर शव का अंतिम संस्कार कर दिया। जबकि बाघिन के शव का बुधवार को पोस्टमार्टम कराया जाएगा। तब मौत के कारण का पता चल सकेगा।

- संग्राम सिंह, उपवन संरक्षक, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।