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सहयोग, दोस्ती, संघर्ष का नवाचार: Razorpay ने कैसे बदली ऑनलाइन पेमेंट्स की दुनिया? जानें कंपनी के बार में सबकुछ

रेज़रपे की संस्थापक टीम के सदस्य आयुष बंसल (वाइस प्रेसिडेंट और जनरल मैनेजर, स्ट्रेटजी) और सागर सक्सेना (वाइस प्रेसिडेंट, अकाउंट्स) और अनुराधा भारत (एचआर की पूर्व प्रमुख) से बातचीत के प्रमुख अंश-

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10 साल पहले 2014 में जयपुर के दो युवा हर्षिल माथुर और शशांक कुमार ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर रेज़रपे की नींव रखी। रेज़रपे की संस्थापक टीम में संस्थापकों के अलावा सागर सक्सेना, आयुष बंसल, शशांक मेहता, चेत्ती अरुण, ऋषव कुमार, प्रणव गुप्ता और अभय राणा (नेमो) का नाम भी शामिल है। आज रेज़रपे ऑनलाइन पेमेंट्स के लिए एक वैश्विक नाम बन चुका है। कंपनी का वार्षिक टोटल पेमेंट वॉल्यूम 180 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। पढ़ें रेज़रपे की संस्थापक टीम के सदस्य आयुष बंसल (वाइस प्रेसिडेंट और जनरल मैनेजर, स्ट्रेटजी) और सागर सक्सेना (वाइस प्रेसिडेंट, अकाउंट्स) और अनुराधा भारत (एचआर की पूर्व प्रमुख) से बातचीत के प्रमुख अंश-

प्रश्न : आप सभी रेज़रपे का हिस्सा कैसे बने?

अनुराधा: 9 साल पहले इस स्टार्टअप के बारे में पता चला। उस समय मुझे नहीं पता था कि पेमेंट गेटवे क्या होता है? आयुष और हर्षिल से मेरी पहली मुलाकात बहुत मजेदार थी। मैं फॉर्मल कपड़ों में थी, जबकि ये पायजामा और चप्पल में थे, लेकिन उनके दृष्टिकोण मुझे बहुत प्रभावित किया और में रेज़रपे का हिस्सा बन गई ।

आयुष: हर्षिल को मैं स्कूल के दिनों से जानता हूं और जब उसने रेज़रपे के बारे में सोचना शुरू किया तो मैंने मदद करने के बारे में सोचा। फिर भले ही वह इंटर्नस् को हायर करने की ही बात क्यों न हो। फिर क्या था, एक बात ने दूसरी बात को जन्म दिया और जल्द ही मैं रेज़रपे के बिजनेस को पेमेंट गेटवे के रूप में पिच करने, लोगों को हायर करने, ऑपरेशंस संभालने जैसे काम करने लगा। शुरुआत से ही हम सबका हाथ बंटाना जरूरी था।

सागर: मेरी कहानी थोड़ी अलग है। मैंने आधिकारिक रूप से टीम से जुड़ने से पहले ही रेज़रपे से जुड़ना शुरू कर दिया था। यह जयपुर में वीकेंड ट्रिप्स पर जाने से शुरू हुआ, जहां हम बिजनेस आइडियाज पर चर्चा करते थे। जब हर्षिल और शशांक (संस्थापक) ने कहा, ‘हमसे क्यों नहीं जुड़ जाते?’ तो मैंने बिना किसी संकोच के जॉइन कर लिया। शुरुआती दिनों में हम एक साथ बिजनेस को पिच करते थे, प्लगइन डवलप करते थे और ऑपरेशन्स मैनेज करते थे।

प्रश्न : एक ऐसा चुनौतीपूर्ण पल कौनसा था जो आप कभी नहीं भूलते?

आयुष: ‘ग्रेट पेमेंट गेटवे शटडाउन’ याद है? 2014 में जब मैंने जॉइन किया था, तो हमारी पार्टनर बैंक ने हमसे संपर्क तोड़ लिया। हमारे पास सैकड़ों व्यापारी थे जो हमसे नाराज थे। कस्टमर्स हमें गालियां दे रहे थे और हम सभी बारी-बारी से उनकी कॉल्स उठाते थे और उन्हें शांत करते थे। हमने कभी हार नहीं मानी।

सागर: हां! मुझे याद है, एक व्यापारी ने हमें 25 बार कॉल किया था। वह आदमी हमारे टीम के सभी नाम जानता था। लेकिन जब हम सब ठीक कर पाए तो उसकी वफादारी कभी नहीं डगमगाई।

अनुराधा: मेरे लिए चुनौती स्टार्टअप जीवन में ढलने की थी। कॉर्पोरेट अनुभव के 12 साल बाद यह बिल्कुल नया था। कोई संरचना नहीं थी, न कोई पॉलिसी, न कोई ऑफिस। ऐसे माहौल में काम कैसे किया जाता है? मुझे बहुत कुछ फिर से सीखना पड़ा और साथ ही रेज़रपे की ऊर्जा के साथ मेल खाते हुए एचआर प्रैक्टिसेस बनानी पड़ी।

प्रश्न : रेज़रपे ने आज जो सफलता पाई है, वह जबरदस्त है। संस्थापक टीम के रूप में आप सभी ने इस संबंध को कैसे बनाए रखा?

सागर: एक तरीका था रात-रात भर की समस्या सुलझाने वाली बैठकों के जरिए हम एक-दूसरे से जुड़े रहते थे। हम शिफ्टों में काम करते थे। हर्षिल 5 बजे तक काम करता था फिर मैं उसकी जगह लेता था और आयुष सुबह की शिफ्ट लेता था। हम एक ऐसी लय में काम कर रहे थे, जहां कोई भी कस्टमर्स के लिए 24/7 उपलब्ध होता था। यह एक तरह की रिले रेस जैसा महसूस होता था!

आयुष: बिल्कुल। जब आप साथ मिलकर उतार-चढ़ाव शेयर करते हैं, तो वो एक जीवनभर का बंधन बना देता है। जैसे एक बार जब हमें Razorpay.com डोमेन खरीदना पड़ा, क्योंकि एक बैंक हमारे नाम को गलत लिख रहा था। तब हम सब बहुत हंसे थे और आज भी उस पल को याद कर हंसी आती है।

प्रश्न : रेज़रपे के भविष्य के बारे में आपको सबसे ज्यादा क्या उत्साहित करता है?

आयुष: हम अभी केवल शुरुआत में हैं। मैं हमें वैश्विक स्तर पर विस्तार करते हुए देखता हूं, जो पैसों के लेन-देन के लिए सबसे पसंदीदा प्लेटफॉर्म बने। लेकिन रेवेन्यू से ज्यादा, मुझे इस बात की खुशी है कि हम ऐसे लीडर्स की एक विरासत बना रहे हैं जो दूसरों को प्रेरित करें।

सागर: मैं भी सहमत हूं। मैं चाहता हूं कि राजोरपे भारत का ‘पे पल माफिया’ बने, जो प्रतिभाओं और विचारों के लिए एक लॉन्चपैड हो। यह सोच केवल पेमेंट से जुड़ी नहीं है बल्कि लोगों को सशक्त बनाने के बारे में भी है।

अनुराधा: मेरे लिए, यह लोगों को प्राथमिकता देने के बारे में है। राजोरपे को हमेशा ऐसा स्थान बनाना चाहिए, जहां कर्मचारी मूल्यवान और प्रेरित महसूस करें। यही वो राज है जिसके कारण हम जो कुछ भी हासिल कर पाए हैं, वो मुमकिन हो सका।

प्रश्न : आप जो लोग स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं, उन्हें क्या सलाह देंगे?

अनुराधा: हमेशा सही काम करो, भले ही यह मुश्किल हो। पहले दिन से ही विश्वास और सहानुभूति की संस्कृति बनाओ। सफलता खुद ब खुद आएगी।

सागर: अपने कस्टमर्स को सुनो। उनकी जरूरतों को समझो, फिर कुछ बनाओ। कभी भी अपनी टीम की ताकत को कम मत आंको।

आयुष: मजा लो! स्टार्टअप्स मुश्किल होते हैं, लेकिन वो बहुत रोमांचक भी होते हैं। अपने साथ ऐसे लोगों को रखो जो आपके विजन पर विश्वास करते हों और सफर का आनंद उठाओ।

(प्रायोजित कंटेंट)

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