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रीपर मशीन बनी किसानों का सहारा

रीपर मशीन बनी किसानों का सहाराफसल कटाई के लिए नहीं मिल रहे मजदूरकिराए की मशीन से फसल कटाई करने पर मजबूर किसान७०० रुपए प्रति बीघा की दर से मिल रही मशीन

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Apr 10, 2020

रीपर मशीन बनी किसानों का सहारा

रीपर मशीन बनी किसानों का सहारा

वर्ष 1947 में आजादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने अपने एक भाषण में कहा था, बाकी सब कुछ इंतजार कर सकता है, कृषि नहीं, लेकिन लॉकडाउन ने देश के लाखों किसानों का इंतजार बढ़ा दिया है।
कोरोना वायरस के कारण पूरे देश में लॉकडाउन है। गेहूं की कटाई और दौनी के लिए सरकार और आईसीएआर ने भी गाइड लाइन जारी की है। लॉकडाउन होने के बाद मजदूर पलायन कर अपने घरों का रुख कर चुके हैं। ऐसे में किसानों के लिए गेहूं की कटाई का एकमात्र साधन रीपर बाइंडर मशीन बनी है। रीपर मालिक किसानों को ७०० रुपए प्रति बीघा की दर से यह मशीन उपलब्ध करवा रहे हैं जिससे किसानों ने अपनी फसलों की कटाई शुरू कर दी है। कोरोना के चलते लॉक डाउन के कारण मजदूरों के टोटे के बाद अब रीपर बाइंडर मशीन किसानों के लिए सहारा बन रही है। रीपर बाइंडर मशीन से एक घंटे में एक एकड़ में खड़ी फसलों की कटिंग कर सकती है। इस मशीन के माध्यम से एक व्यक्ति द्वारा कटिंग के साथ ऑटोमेटिक गठरियां बांधने का कार्य किया जा सकता है। खास बात यह है कि यह मशीन बारिश के समय और पेटाकाश्त जमीन पर भी आसानी से कार्य करती है। इससे खेतों में उगने वाली झाडिय़ों की भी कटिंग की जा सकती है।

मजदूरों के सामने दोहरा आर्थिक संकट
गौरतलब है कि कोरोना के कारण सरकार ने लॉकडाउन घोषित कर दिया और इस लॉक डाउन के कारण दिहाड़ी मजदूरों के समक्ष रोजगार का संकट पैदा हो गया और उन्होंने अपने अपने गांवों की ओर रुख कर लिया। एेसे में अब किसानों के सामने मजदूरों का भी टोटा हो चुका है एेसे में किसानों को समझ नहीं आ रहा कि वह अपने फसल की कटाई के लिए मजदूर कहां से लेकर आएं, क्योंकि स्थिति यह है कि कोरोना वायरस के डर से कोई घर से बाहर नहीं निकल पा रहा है तो ऐसे में गेंहू की कटाई के लिए अब किसानों ने किराए पर रीपर मशीन का सहारा लिया है। आपको बता दें कि प्रदेश में एेसे किसान भी बड़ी संख्या में हैं जिन्होंने महाजन से सूद पर कर्ज लेकर खेती की थी। इस वर्ष गेहूं की अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। रबी फसल ही उनके जीवनयापन का एक मात्र सहारा है। एेसे में अब किसानों को दोहरा आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है।

किसानों को भी मौसम का डर
आपको बता दें कि एक तो फसल काटने में लगातार हो रही देरी के बाद किसानों को मौसम का भी डर सता रहा है। किसानों का कहना है कि अप्रैल के पहले सप्ताह में किसान मंडियों में होते थे, अपनी मेहनत की कमाई का हिसाब किताब कर रहे होते थे, लेकिन इस साल अभी वे कटाई को लेकर चिंतित हैं। दुआ कर रहे हैं कि फसल किसी तरह कट जाए, मंडियों तक सही सलामत पहुंच जाए क्योंकि कुछ दिनों पहले मौसम के बदल जाने से बारिश के कारण फसल की गुणवत्ता खराब हो गई। जिसके परिणामस्वरूप गेंहू की चमक कम हो गई है।