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जयपुर। सरकार की ओर से तय निर्धारित शुल्क से अधिक शुल्क कॉलेजों ने लिया तो उनकी मान्यता निरस्त हो सकती है। हाल ही राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के मान्यता आदेश के अनुसरण में प्रदेश के 48 शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालयों को सत्र 2018—19 के लिए बीए, बीएड और बीएससी, बीएड के संचालन के लिए अस्थाई अनापत्ति प्रमाण पत्र दिए गए हैं।
गौरतलब है कि ये प्रमाण पत्र केन्द्रीय प्रवेश व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को प्रवेश के लिए दिए गए हैं। इसमें जिला, संबंधित संस्था का नाम व पता, एनसीटीई के मान्यता आदेश व क्रमांक, सीटों की संख्या व कॉलेज की श्रेणी बताई गई है। प्रदेश में केन्द्रीयकृत प्रवेश व्यवस्था के तहत महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के माध्यम से पीटीईटी परीक्षा की मेरिट के आधार पर प्रवेश दिए जाएंगे।
कॉलेज आयुक्त आशुतोष ए.टी.पेडणेकर ने बताया कि विश्वविद्यालय/महाविद्यालय सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त किसी भी प्रकार की कोई राशि विद्यार्थियों से नहीं लेंगे। यदि इस संबंध में किसी भी प्रकार की शिकायत मिलती है तो संबंधित विश्वविद्यालय/महाविद्यालयों को तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों को एनसीटीई व राज्य सरकार द्वसरा निर्धारित सभी मापदण्डों को पूरा करना होगा। मापदण्डों को पूरा करने पर राज्य सरकार अनापत्ति प्रमाण पत्र निरस्त कर सकती है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय/महाविद्यालयों को योग्यताधारी शिक्षक ही रखने होंगी।
सभी को बनानी होगी वेबसाईट
सभी शिक्षक—प्रशिक्षण संस्थाओं को स्वयं की वेबसाईट भी बनानी होगी। इसके साथ ही हर 15 दि में वेबसाईट को अपडेट करना होगा। उनके यूआरएल नेम को आवेदन में अंकित करना होगा। इस वेबसाईट में महाविद्यालय को आधारभूत संरचना से संबंधित दस्तावेज, महाविद्यालय भवन में उपलब्ध कक्षों की संख्या, प्रयोगशाला, माप व चित्र आदि की जानकारी देनी होगी।
महाविद्यालय में संचालित कोर्स में कुल स्वीकृत सीट, प्रवेशित छात्रों की संख्या आदि भी बतानी होगी। एनसीटीई रेगुलेशन 2017 के नियमानुसार संबंधित विश्वविद्यालय से अनुमोदित शैक्षणिक स्टॉफ व अशैक्षणिक स्टॉफ की सूची भी अपलोड करनी होगी।
Published on:
28 Mar 2018 07:52 am
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