2 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सरसों की रिकॉर्ड पैदावार, एमएसपी से नीचे बिक रही फसल…किसानों को नुकसान

आयात किए जा रहे खाद्य तेल पर देश की निर्भरता चिंता का विषय है और इस चुनौती से निपटने के लिए भारत को तिलहन फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के तरीकों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

2 min read
Google source verification
सरसों की रिकॉर्ड पैदावार, एमएसपी से नीचे बिक रही फसल...किसानों को नुकसान

सरसों की रिकॉर्ड पैदावार, एमएसपी से नीचे बिक रही फसल...किसानों को नुकसान

आयात किए जा रहे खाद्य तेल पर देश की निर्भरता चिंता का विषय है और इस चुनौती से निपटने के लिए भारत को तिलहन फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के तरीकों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। भारत में लगभग एक तिहाई खाद्य तेल की आपूर्ति तोरिया और सरसों से होती है, जो इन्हें देश की प्रमुख खाद्य तिलहन फसल बनाता है। खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सरसों सबसे महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है। साथ ही कम लागत और कम सिंचाई में यह फसल अधिक उत्पादन भी देती है। लेकिन सरसों किसानों को एमएसपी से नीचे दाम मिलने के कारण भारी नुकसान हो रहा है। द सॉल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अजय झुनझुनवाला ने सरकार से एमएसपी मूल्य को बढ़ाने का आग्रह किया है, जिससे प्रदेश को सरसों आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

यह भी पढ़ें : चांदी से भी तेज दौड़ रहा सोना, बीस दिन में 3650 रुपए उछला

सरसो मॉडल फार्म प्रोजेक्ट

द सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक डॉ. बी. वी. मेहता ने कहा कि सरसो मॉडल फार्म प्रोजेक्ट के तहत, सरसो के मॉडल फार्म विकसित किए जाते हैं, जिसमें खेत की तैयारी, बीज तैयार करने, बुवाई प्रबंधन, पोषक तत्व प्रबंधन, उर्वरक, पौधों के विकास प्रबंधन, सिंचाई का समय निर्धारण और कटाई आदि में किसानों को सहायता दी जाती है। यह मॉडल फार्म आसपास के सभी किसानों के लिए एक आदर्श के रूप में काम करते हैं। इस प्रक्रिया के माध्यम से किसानों को सरसों के उत्पादन में उन्नत एवं वैज्ञानिक तकनीक को समझने में मदद मिलती है जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि संभव होती है।

यह भी पढ़ें : निर्यात मांग से लालमिर्च महंगी, इस साल पैदावार कम

1234 मॉडल फार्म विकसित किए गए

सरसो मॉडल फार्म प्रोजेक्ट के प्रबंध निदेशक डॉ. शताद्रु चट्टोपाध्याय ने कहा कि यह परियोजना वर्ष 2020-21 में राजस्थान के 5 जिलों में 400 मॉडल फार्म के साथ प्रारंभ की गई थी। 2021-22 में, परियोजना को 500 अतिरिक्त मॉडल फार्मके साथ राजस्थान और मध्य प्रदेश में विस्तारित किया गया। 2022-23 में, 1234 मॉडल फार्म विकसित किए गए हैं। इस वर्ष राजस्थान और मध्यप्रदेश के साथ ही परियोजना का विस्तार अयोध्या (उत्तर प्रदेश) और संगरूर (पंजाब) में भी किया गया है, जिसमे जे.आर एग्रो इंडस्ट्रीज और रायसीला फाउंडेशन, धुरी का सहयोग प्राप्त हुआ है। इस प्रकार अब तक 2100 से अधिक मॉडल फार्म 04 राज्यों में स्थापित किए गए हैं।

Story Loader