
जयपुर। प्रदेश में रेडक्रास प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण करीब सवा साल से बंद है। इसके कारण पूरे प्रदेश के हजारों युवाओं के भविष्य पर तलवार लटकी हुई है। किसी भी युवा को परिचालक बनने के लिए 18 साल की उम्र, 10वीं पास और 15 दिन की प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण अनिवार्य है लेकिन रेडक्रास ने पिछले साल 24 मार्च को लॉकडाउन लगने के साथ ही प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण ही बंद कर दिया। इसके कारण न तो कोई युवा प्रशिक्षण ले पा रहा है और न ही उसका परिचालक लाइसेंस बन रहा है। यह प्रशिक्षण परिचालकों को इसलिए दिया जाता है जिससे वह दुर्घटना की स्थिति में अपने यात्रियों की सुरक्षा, सहायता और उपचार कर सके।
रेडक्रास का प्रशिक्षण रूकने के कारण राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम में मृतक आश्रितों को नियुक्ति देने की पहल भी अटक गई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 5 वर्ष से पुराने मृतक आश्रितों के मामलों को देखते हुए नियम में एक मुश्त स्थिलथा दी थी। इसे निश्चित समय में पूरा किया जाना था लेकिन रेडक्रास से प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण न मिलने के कारण यह पूरी नियुक्ति ही अटक गई है। कोरोना काल में एक तरफ पहले से ही रोजी रोटी का संकट है वहीं एक मात्र प्रशिक्षण ने नौकरी अटका रखी है।
राजस्थान रोडवेज के अधिकारियों की माने तो 550 युवाओं को नौकरी दी जानी है। इसमें से आधे परिचालक पद के लिए नामित होंगे। सवा साल से यह मामला अटका हुआ है। ऐसे में कई लोगों के उम्र पार करने की भी समस्या हो सकती है। एक अधिकारी ने बताया कि हम तो आश्रितों को नौकरी देने के लिए तैयार बैठे हैं लेकिन जब कागज ही नहीं पूरे हैं तो हम कैसे कर सकते हैं।
आनलाइन प्रशिक्षण क्यों नहीं
प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण न होने होने से एक तरफ जहां युवाओं के भविष्य पर क्रास लग रहा है वहीं रेड क्रास पर भी प्रश्न उठ रहे हैं। सवाल यह है कि अगर पूरे देश में कई प्रशिक्षिण शिविर आनलाइन कराए जा सकते हैं तो फिर रेडक्रास प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण आनलाइन क्यों नहीं करा सकता है। इस संबंध में हमने रेडक्रास सोसाइटी के प्रमुख सुधीर शर्मा से बात की तो उन्होंने बैठक में होने का हवाला दिया।
Published on:
24 Jun 2021 04:17 pm
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