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रीट को रद्द करने से हाईकोर्ट का इंकार

हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने कहा, कुछ लीकेज में पूरी परीक्षा नहीं कर सकते रद्द

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जयपुर। जनहित का मुद्दा बताकर रीट-2021 को चुनौती देने वाले अभ्यर्थी हाईकोर्ट में फिलहाल फेल हो गए हैं। कोर्ट ने मामले को जनहित याचिका के रूप में सुनने से इंकार कर दिया, लेकिन याचिकाकर्ताओं को इसे सामान्य याचिका के रूप में पुन: दायर करने की छूट दी है।

न्यायाधीश गोवर्धन बाढ़दार और न्यायाधीश मनोज कुमार व्यास की खंडपीठ ने सोमवार को भागचंद शर्मा व अन्य की याचिकाओं को निस्तारित करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में जनहित में रीट भर्ती को रद्द करने का आग्रह किया गया था, जिस पर राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता एमएस सिंधवी ने कहा कि कुछ लीकेज के लिए पूरी परीक्षा को रद्द नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने मामले को जनहित याचिका के जरिए उठाने पर भी सवाल उठाया। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर अधिवक्ता विज्ञान शाह ने कहा कि इसमें कोई जनहित का मामला नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिस पर कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए याचिका को निस्तारित कर दिया और एकलपीठ में मामला रखने की छूट दी।

यह बोले पक्षकार
याचिकाकर्ता पक्ष— सुनवाई पूरी होने तक परिणाम जारी करने पर रोक लगाई जाए और पूरी भर्ती की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से करवाई जाए।
राज्य सरकार— सुप्रीम कोर्ट नीट परीक्षा के मामले में कह चुका है कि कुछ लीकेज के लिए अन्य आम छात्रों के हितों को अनदेखा नहीं किया जा सकता है।