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कैंसर के मरीजों को राहत, राज्य कैंसर संस्थान शुरू

- उद्घाटन होना बाकी, ओपीडी, आइपीडी की सुविधाएं चालू- रोजाना 70-80 कैंसर के मरीजों का हो रहा इलाज- प्रताप नगर, सीतापुरा, सांगानेर, शिवदासपुरा सहित दूर—दराज से आने वाले मरीजों को एसएमएस तक नहीं आना होगा  

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जयपुर

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Ankit Dhaka

Feb 23, 2020

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जयपुर. कैंसर के मरीजों के लिए अच्छी खबर है। अब एक ही छत के नीचे मरीजों को हर तरह की सुविधाएं दी जा रही है। 120 करोड़ रुपए की लागत से प्रताप नगर में बना राज्य कैंसर संस्थान में ओपीडी और इंडोर शुरू हो चुका है। हालांकि अभी कैंसर संस्थान के उद्घाटन का इंतजार है, लेकिन कैंसर मरीजों को ध्यान में रखते हुए संस्थान को शुरू कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार संस्थान में आउटडोर में रोजाना 70-80 मरीजों का इलाज किया जा रहा है और 30-40 भर्ती मरीजों की कीमोथैरेपी की जा रही है। संस्थान के शुरू होने से सीतापुरा, प्रतापनगर, सांगानेर, शिवदासपुरा से आने वाले मरीजों को काफी सहूलियत मिली है। अब उन मरीजों को एसएमएस अस्पताल का लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ रहा है। शुरुआत में मेडिकल ऑन्कोलॉजी, रेडियोथैरेपी ऑन्कोलॉजी और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी ओपीडी शुरू की गई है।
संस्थान के अधीक्षक डॉ. संदीप जसूजा ने बताया कि सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को ओपीडी शुरू की गई है। मेमोग्राफी, सोनोग्राफी और डिजिटल एक्स-रे की मशीन आ चुकी है। मॉलिक्यूलर ऑन्कोलॉजी, रेडियोथैरेपी की मशीनें जल्द ही आने वाली है। इसके लिए टेंडर हो चुका है। कैंसर की फ्री दवाइयां शुरू हो चुकी हैं। मरीजों को इधर-उधर भटकना नहीं पड़ रहा है।

जल्द शुरू होंगी लैब
अस्पताल में बायोकैमिस्ट्री, पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी की लैब भी जल्द शुरू की जाएंगी। फिलहाल ब्लड की जांच के लिए राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय से मदद ली गई है। इसके अलावा अस्पताल में 20 नर्सिंग स्टाफ, 5 फार्मासिस्ट, 20 गार्ड और चिकित्सकों की नियुक्ति कर दी गई है। हाल में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी तीन मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, दो रेडियोलॉजिस्ट और एक दंत चिकित्सक की नियुक्ति की घोषणा की है।

कैंसर के जीन का चल सकेगा पता
संस्थान में नेकजेन सिक्वेंसी (एनजीएस) की अलग से मशीन लगाई जाएगी। मशीन से कैंसर के जीन का पता लग सकेगा। चिकित्सकों का दावा है कि प्रदेश में इस तरह की मशीन कहीं पर भी नहीं हैं। इसके अलावा इंटरनेशनल सेंटर्स के साथ रिसर्च के लिए एमओयू किया जाएगा, ताकि संस्थान में रिसर्च एक्टिविटी बढ़ सकें।
मेडिकल ऑन्कोलॉजी, रेडियोथैरेपी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के ओपीडी शुरू कर दिए गए हैं। अस्पताल में नई तकनीक की मशीनें भी मंगवाई जा रही है। स्टाफ को शिफ्ट किया जा चुका है।
- डॉ. सुधीर भंडारी, प्रिंसिपल, एसएमएस मेडिकल कॉलेज