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रेमडेसिविर के जीवन रक्षक होने पर उठे सवाल, विशेषज्ञ बोले-हर कोरोना संक्रमित को देना जरूरी नहीं

कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान देश के कई राज्यों सहित राजस्थान में रेमडेसिविर इंजेक्शन की मारामारी के बीच राजस्थान के प्रमुख चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस इंजेक्शन को जीवन रक्षक बताए जाने पर आपत्ति जताई है।

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remdesivir injection uses on medical experts

remdesivir injection

विकास जैन/ जयपुर। कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान देश के कई राज्यों सहित राजस्थान में रेमडेसिविर इंजेक्शन की मारामारी के बीच राजस्थान के प्रमुख चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस इंजेक्शन को जीवन रक्षक बताए जाने पर आपत्ति जताई है। विशेषज्ञों के मुताबिक विभिन्न अध्ययनों में भी यह स्पष्ट हो चुका है कि यह इंजेक्शन हर कोविड संक्रमित को देने की आवश्यकता नहीं है।

नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ हेल्थ अमरीका एनआईए के अध्ययन अनुसार ऑक्सीजन पर चल रहे संक्रमित और उनके लिए भी विशेषज्ञ की सलाह पर ही रेमडेसिविर इंजेक्शन का उपयोग किया जाना चाहिए। यूरोपियन रेस्पिरेटरी सोसायटी के एक अन्य अध्ययन में भी कहा गया है कि वेंटिलेटर पर चल रहे संक्रमितों को यह इंजेक्शन नहीं दिया जाना चाहिए। शेष अध्ययनों में भी इसके हानिकारक या लाभदायक प्रभावों के साक्ष्य नहीं मिले हैं।

बीमारी की अवधि कम करने में ही सहायक
जयपुर के वरिष्ठ चिकित्सक व मुख्यमंत्री कोविड सलाहकार समिति के सदस्य डॉ.वीरेन्द्र सिंह के अनुसार एक साल पहले जब रेमडेसिविर इंजेक्शन आया था, तब इसे जीवन रक्षक बताया गया। लेकिन इसके बाद जो अध्ययन आए, उनमें यह सामने आया कि कि यह बीमारी की अवधि को कम करने में सहायक है। उन्होंने कहा कि यह मृत्यु दर रोकने में अधिक कारगर नहीं है। अभी तक के जो साक्ष्य हैं, उनके अनुसार इसके हानिकारक या लाभदायक प्रभाव सामने नहीं आए हैं।

उपयोग का एक निश्चित प्रोटोकॉल
एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ.सुधीर भंडारी के अनुसार रेमडेसिविर इंजेक्शन के उपयोग का एक निश्चित प्रोटोकॉल है। उसीके अनुसार विशेषज्ञ की सलाह पर इसका उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम आरयूएचएस में 900 मरीजों को संभाल रहे हैं, जिनमें इसी तरह का प्रोटोकॉल उपयोग किया जा रहा है। हर संक्रमित के लिए यह आवश्यक नहीं है।

विशेषज्ञों की सलाह पर ही हो इस्तेमाल
एसएमएस मेडिकल कॉलेज के सीनियर प्रोफेसर मेडिसिन डॉ. रमन शर्मा कहते हैं कि रेमडेसिविर इंजेक्शन की इतनी मांग समझ से परे है। इसे जीवन रक्षक नहीं कहा जा सकता। इस इंजेक्शन के उपयोग से हर मामले में मौत को रोका जाना संभव नहीं होता। इसका उपयोग अधिक संक्रमण, ऑक्सीजन की आवश्यकता और अस्पताल में भर्ती होने पर भी विशेषज्ञ की सलाह पर ही किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि कुछ स्टेरॉयड रेमडेसिविर का विकल्प हो सकते हैं। मॉर्डरेट और गंभीर संक्रमण की स्थिति, ऑक्सीजन की आवश्यकता होने और ऑक्सीजन स्तर लगातार गिरने पर स्टेरॉयड देकर मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। हालांकि कम संक्र मण की स्थिति में स्टेरॉयड का उपयोग भी हानिकारक हो सकता है।

60 हजार में से ऑक्सीजन की जरूरत वाले 6 हजार
राजस्थान की बात करें तो प्रदेश में इस समय रोजाना करीब 10 हजार ऑक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता हो रही है। यानी करीब 60 हजार एक्टिव मामलों में से करीब 6 हजार ऐसे लोग हैं, जिन्हें ऑक्सीजन दी जा रही है। ऐसे मामलों में विशेषज्ञों की सलाह पर रेमडेसिविर या स्टेरॉयड का उपयोग किया जा सकता है। इस समय प्रदेश में करीब 7 हजार संक्रमित अस्पतालों में भर्ती हैं।

मारामारी ऐसी, हो रही कालाबाजारी
इधर, राजस्थान सहित देश में रेमडेसिविर इंजेक्शन की ऐसी मारामारी मची है कि इसकी कालाबाजारी तक सामने आई हैं। केन्द्र को इसके निर्यात पर रोक लगानी पड़ी। राजस्थान के निजी अस्पतालों में इसकी मांग के अनुरूप आर्पूित बनाए रखने में स्वास्थ्य विभाग सफल नहीं हो पा रहा है।