
सांभर झील में पक्षी त्रासदी: झील से मृत पक्षियों के शव तत्काल निकालने के निर्देश
जयपुर
हाईकोर्ट ने सरकार को हाई डेंसिटी के ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल कर सांभर झील के गहरे पानी में पड़े मृत पक्षियों के शवों का पता लगाकर इन्फलेक्टेड ट्यूब का इस्तेमाल कर निकालने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और न्यायाधीश इन्द्रजीत सिंह की बेंच ने यह निर्देश स्व:प्रेरणा से दर्ज जनहित याचिका पर दिए।
अदालत को यह सुझाव न्याय मित्र एडवोकेट नितिन जैन ने दिए थे। अदालत ने सरकार और सांभर साल्ट को २७ नवंबर तक न्याय मित्र की रिपोर्ट पर जवाब देने और एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले में अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी। अदालत ने सरकार को राज्य के अन्य स्थान पर प्रवासी पक्षियों का ध्यान रखने और न्याय मित्र के सुझाव के अनुसार मृत पक्षियों को दफनाने के स्थान पर जलाने के निर्देश भी दिए हैं।
यह बताया न्याय मित्र ने
अब तक करीब 20 हजार पक्षियों की मौत हो चुकी है और मामले में सरकार की लापरवाही रही है। स्थानीय निवासियों ने मीडिया में खबरें आने से पहले ही प्रशासन को पक्षियों के मारे जाने की सूचना दे दी थी लेकिन, प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। झील में अभी भी बड़ी संख्या मंे मृत पक्षी पडे़ हैं और इन्हें फौरन निकालना जरूरी है। यदि इन्हें फौरन नहीं निकाला गया तो अन्य प्रवासी पक्षियों को भी संक्रमण हो जाएगा। न्याय मित्र ने मृत पक्षियों को जमीन में गाडऩे के स्थान पर जलाने का सुझाव भी दिया है।
दलदल के कारण आ रही समस्या
झील के दलदली होने के कारण कोई व्यक्ति ज्यादा अंदर तक नहीं जा सकता। इसलिए हाई डेंसिटी ड्रोन कैमरों से मृत पक्षियों का पता लगाकर इनफ्लेक्टेड ट्यूब का इस्तेमाल कर इन्हें फौरन निकाला जाए। सांभर झील का एरिया ना वन विभाग के पास है और ना पशुपालन विभाग के पास। इसलिए दोनों एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं और दोनों विभागों में कोई सामंजस्य नहीं है। सांभर साल्ट ने कई निजी निर्माताओं को लीज दे रखी है और यह निर्माता नमक बनाने के बाद जहरीला कचरा झील में डाल रहे हैं।
केवल एक रेस्क्यू सेंटर
केवल एक रेस्क्यू सेंटर है और वह भी करीब १५ किलोमीटर दूर है। रेस्क्यू सेंटर के इंतजाम बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं हैं। सरकार के पास झील के गहरे पानी में जाने के कोई इंतजाम नहीं हैं और सरकारी एजेंसी मृत पक्षियों को निकालने के लिए पानी कम होने का इंतजार कर रही है। बीमार और बचाए गए पक्षियों को फौरन रेस्क्यू सेंटर ले जाने से पहले घंटों तक एक ओपन बॉक्स में रखा जा रहा है। झील के पास कोई टैंपरेरी रेस्क्यू सेंटर नहीं है और कार्मिकों की भी बेहद कमी है।
यह दिए सुझाव
न्याय मित्र ने सांभर झील को फॉरेस्ट एरिया या वाइल्ड लाइफ सेंचुरी घोषित करने, प्राइवेट नमक निर्माण का काम बंद करने, झील व इसके आस-पास गैर-कानूनी गतिविधियों को बंद करने के लिए सांभर डवलपमेंट व संरक्षण ऑथोरिटी बनाने और वेटलैंड कंजर्वेशन रुल्स-2017 की पालना के साथ झील के चारों ओर दो किलोमीटर के एरिया को बफर जोन घोषित करने का सुझाव भी दिया है।
कोर्ट में सरकार का जवाब
सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता गणेश परिहार ने रिपोर्ट पेश कर बताया है कि झील में करीब 83 किस्म के पक्षी आते हैं। राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ एनिमल साइंस की जांच रिपोर्ट के अनुसार पक्षी एविएन बोटुलिज्म के कारण मर रहे हैं।
अब तक यह किया सरकार ने
जयपुर जिले में पडऩे वाले झील के एरिया में 8825 और नागौर में 9649 कुल 18 हजार 474 मृत पक्षियों का निपटारा किया है और कुल 788 पक्षियों को रेस्क्यू किया है। 20 वैटरनरी डॉक्टर और 74 लाइव स्टॉक असिस्टेंट चार आपातकालीन मोबाइल वैटरनरी क्लिनिक चला रहे हैं। इसके साथ ही मृत पक्षियों के निपटारे में सैकड़ों कर्मचारी लगे हुए हैं और सरकार के उठाए गए कदमों के कारण मृत पक्षियों की संख्या में कमी आई है। सरकार को अन्य कई एजेंसियों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
Updated on:
22 Nov 2019 09:30 pm
Published on:
22 Nov 2019 08:27 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
