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आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी पर राजस्थान में होगा रिसर्च, पढ़ेगे, सीखेंगे युवा, जिन्दगी और होगी सुविधा लैस

बनेगी एआईओटी (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी आफॅ थिंग्स) रिसर्च लैब

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आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी पर राजस्थान में होगा रिसर्च, पढ़ेगे, सीखेंगे युवा, जिन्दगी और होगी सुविधा लैस

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी पर राजस्थान में होगा रिसर्च, पढ़ेगे, सीखेंगे युवा, जिन्दगी और होगी सुविधा लैस

भवनेश गुप्ताआर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी पर राजस्थान में होगा रिसर्च, पढ़ेगे, सीखेंगे बच्चे- युवा, जिन्दगी और होगी सुविधा लैस
---स्पॉटलाइट---
-प्रदेश में बनेगी एआईओटी (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी आफॅ थिंग्स) रिसर्च लैब, 190 करोड़ रुपए से होगी तैयार
-राज्य सरकार ने कंपनी गठन को दी मंजूरी, प्रदेश के युवाओं की भूमिका भी होगी सुनिश्चित, रिसर्च के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा
-नए इनोवेशन भी होंगे

जयपुर। आपके पास कार है। यदि कार के किसी पार्ट में खराबी आती है तो कार स्वत: ही मेन्यूफ्रेक्चर को केयर का डेटा भेज देगी। मेन्यूफ्रेक्चर कंपनी आपके मोबाइल पर मैसेज भेज देगी कि कार के संबंधित पार्ट में खराबी हो गई है, तत्काल ठीक करा लें। इसी तरह से आमजन की जिंदगी को और सुविधाजनक बनाने के लिए राजस्थान हब बनने जा रहा है। यह सब कुछ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी आॅफ थिंग्स (एआईओटी) की इनोवेशन लैब के जरिए होगा।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर में रिसर्च लैब के गठन को राजस्थान सरकार ने मंजूरी दे दी है। इसके लिए अलग से कंपनी का गठन किया जा रहा है। खास यह है कि यहां ऐसी डिवाइस तैयार की जाएगी, जो मेडिकल, उद्योग, ट्रेफिक, कृषि, शिक्षा, परिवहन जैसे बड़े सेक्टर को नई तकनीक से जोड़ेगी। यहां शैक्षणिक कोर्स भी चलाए जाएंगे। यानि, यहीं पढ़ेंगे, सीखेंगे, रिसर्च करेंगे। इससे प्रदेश के युवाओं को दूसरे देशों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

इसलिए रिसर्च की जरूरत
-यह हो रहा : अभी हार्डवेयर डिवाइस पर ज्यादा फोकस है। मसलन, सड़क क्षेत्र में कैमरे तो लगा दिए, लेकिन उसकी मॉनिटरिंग और प्लानिंग के लिए ज्यादातर मामलों में अभी भी कर्मचारियों पर निर्भरता है।
-यह होगा : ऐसा हार्डवेयर सिस्टम, सड़क पर गुजरने वाले वाहनों को सेंस कर रहा है या इमेज ले रहा है, वह डेटा में परिवर्तित होगा। इसके लिए डिवाइस तैयार की जाएगी, जो आर्टिफिशयल इंटेलीजेंसी और सेंसर से मिलकर तैयार होगी। इस डिवाइस से उस डेटा के जरिए स्वत: ही संबंधित सड़क क्षेत्र में व्यवस्थित ट्रेफिक की प्लानिंग हो जाएगी।

राजस्थान की भूमिका
लैब के लिए केन्द्र सरकार की ओर से फंडिंग दी गई है। इसमें राजस्थान की भूमिका सुनिश्चित हो, इसके लिए राज्य सरकार ने आईआईटी जोधपुर की सहमति के आधार पर कंपनी गठन को मंजूरी दी है। इसमें सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग (डीओआईटी) के प्रमुख शासन सचिव चेयरमेन होंगे। वहीं, 3-3 निदेशक राज्य सरकार और आईआईटी जोधपुर के होंगे।

यह भी होगा
-आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आॅफ थिंग्स का मतलब चीजों का इंटरनेट। अभी तक फेसबुक, वाट्सएप, यूट्यूब के जरिए हम एक-दूसरे से कनेक्ट हैं, लेकिन आईओटी के जरिए एक-दूसरी चीजों से भी कनेक्ट हो जाएंगे।
-इससे स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी मदद मिलेगी।
-इंडस्ट्री के डवलपमेंट के लिए रिसर्च कैसे प्रोडक्शन को बढ़ा सकती है, ऑटोमैटिक विजन बेस्ड सिक्योरिटी, प्रॉडक्शन व प्रॉडक्शन प्रोसेस को आसान करने जैसे विषयों से जुड़ा रिसर्च होगा।

फैक्ट फाइल
-190 करोड़ रुपए आंकी गई है लागत
-120 करोड़ रुपए केन्द्र सरकार देगी
-70 करोड़ रुपए राजस्थान सरकार का हिस्सा
-अक्टूबर, 2023 तक कोर्स शुरू होने की उम्मीद
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-यह केवल रिसर्च लैब ही नहीं, बल्कि इनोवेशन हब होगा। हार्डवेयर प्रोडेक्ट और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस मिलकर ऐसी डिवाइस तैयार होगी, जो कई सेक्टर में अभी संभव नहीं हो पा रही है। -प्रो. शांतनु चौधरी, निदेशक, आईआईटी जोधपुर

-एआईओटी के जरिए आमजन को सुविधा लैस बनाने के लिए बड़ा काम होगा। खासकर, उनके लिए जो प्रोटोटाइप बनाना चाह रहे हैं। रिसर्च लैब में राज्य के युवाओं, बच्चों की भूमिका को भी सुनिश्चित किया गया है। -तपन कुमार, संयुक्त निदेशक, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग, राजस्थान


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