
जयपुर।
राजस्थान की भर्ती प्रक्रिया में युवाओं के एक वर्ग को आरक्षण का लाभ नहीं देना सरकार और उसके अफसरों को भारी पड़ सकता है। दरअसल, सोमवार को हाईकोर्ट ने अदालती आदेश के बावजूद भरतपुर और धौलपुर के जाटों को भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण का लाभ नहीं देने पर गहरी नाराज़गी जताई है।
अदालती आदेश के बावजूद नर्स ग्रेड- 2 और एएनएम भर्ती-2013 में भरतपुर और धौलपुर के जाटों को ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया। ऐसे में अब अदालत ने सुनवाई के बाद कार्मिक सचिव को आठ मई को हाजिर होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। न्यायाधीश आलोक शर्मा ने यह अंतरिम आदेश चन्द्रशेखर व अन्य की अवमानना याचिका पर दिए है।
याचिका में बताया कि राज्य सरकार ने फरवरी-2013 में 15 हजार से अधिक नर्स ग्रेड द्वितीय और एएनएम के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किया था।याचिकाकर्ताओं ने ओबीसी वर्ग में आवेदन किया था लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया के लंबित रहने के दौरान ही हाईकोर्ट ने 10 अगस्त, 2015 को भरतपुर व धौलपुर के जाटों को दिया गया आरक्षण रद्द कर दिया था।
राज्य सरकार ने 23 अगस्त, 2017 को भरतपुर और धौलपुर के जाटों को पुन: ओबीसी मानते हुए आरक्षण का लाभ दे दिया। नर्स ग्रेड द्वितीय 2013 की भर्ती प्रक्रिया जारी है। इसके बावजूद याचिकाकर्ताओं को ओबीसी वर्ग में मेरिट में होने के बावजूद ओबीसी के तहत नियुक्तियां नहीं दी जा रही हैं।
हाईकोर्ट ने पिछले दिसंबर महीने में याचिकाकर्ताओं को ओबीसी वर्ग में नियुक्ति देने के निर्देश दिए थे। लेकिन राज्य सरकार ने अदालती आदेश की पालना नहीं की है।
... इधर, यूजीसी ने रोस्टर आरक्षण की प्रतियां जलाकर जताया विरोध
'इंडिया फॉर सोशल जस्टिस' के बैनर तले सोमवार को राजस्थान विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर छात्रों ने यूजीसी की ओर से हाल ही में जारी आरक्षण के नए रोस्टर संबंधी सर्कुलर की प्रतियों को जलाया। शोधार्थी काना राम रैगर ने बताया कि यह सर्कुलर तत्काल प्रभाव से वापस नहीं लिया गया, तो देशभर के छात्र अखिल भारतीय छात्र आन्दोलन करेंगे।
गौरतलब है कि यूजीसी ने 5 मार्च 2018 को उच्च शिक्षा में विभागवार रोस्टर प्रणाली लागू लिए जाने का समयबद्ध निर्देश जारी किया था। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालयों में विभागवार रोस्टर प्रणाली के लागू होने से उच्च शिक्षा में आरक्षण खत्म हो जाएगा।
विभागों में सीटों की संख्या कम होने से आरक्षित वर्ग के लिए अवसर ही समाप्त हो जाएंगे। जबकि अभी तक विश्वविद्यालय या कॉलेज को एक इकाई मानकर रोस्टर निर्धारित किया जाता था। अभी तक गढ़वाल विवि, पटना विवि, बिलासपुर विवि, सांची विवि, विलासपुर, बीएचयू, इलाहाबाद विवि, लखनऊ विवि, मेरठ विवि, कानपुर विवि, पूर्वांचल विवि आदि कई विश्वविद्यालयों के छात्र इसके विरोध में उतर चुके हैं।
Published on:
08 May 2018 01:25 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
