जयपुर में 19-20 नवम्बर को आयोजित होने वाले रिसर्जेंट राजस्थान पार्टनरशिप समिट में एमएसएमईः ग्रोथ इंजन आॅफ मेक इन इण्डिया आॅपच्र्युनिटी एंड चैलेंजेज विषय पर एक विशेष सम्मेलन समिट के दूसरे दिन आयोजित किया जाएगा। केन्द्रीय सुक्ष्म, लघु और मझौले उद्यम (एमएसएमई) मंत्री कलराज मिश्र इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि होंगे।
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इस अवसर पर मौजूद रहेगी राजस्थान में एमएसएमई क्षेत्र में संभावनाओं को तलाशने के लिये प्रतिभागी उद्यमियों को आमंत्रित करेंगी। वर्तमान में राजस्थान के करीब 90 प्रतिशत उद्योग एमएसएमई की श्रेणी में आते हैं और इनसे करीब 18.7 लाख व्यक्तियों को रोजगार मिला हुआ है।

इस सम्मेलन के मुख्य वक्ता भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के सचिव, डाॅ. अनूप के. पुजारी होंगे। इस सत्र में राजस्थान में निवेश के तुलनात्मक लाभ राजस्थान से हस्तशिल्प निर्यात की अपार संभावनाओं, फाइनेंस एवं मार्केटिंग जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी। सम्मेलन के अन्य वक्ताओं में स्टेट बैंक आॅफ बीकानेर एंड जयपुर के प्रबन्ध निदेशक ज्योति घोष, दिलीप इण्डस्ट्रीज के प्रबन्ध निदेशक दिलीप बैद, लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओ.पी. मित्तल और इंडिया मार्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश अग्रवाल होंगे।

दूसरा बडा रोजगार प्रदाता क्षेत्रगौरतलब है कि राजस्थान में एमएसएमई क्षेत्र में निरंतर वृद्धि हुई है और कृषि के बाद अब यह दूसरा रोजगार प्रदाता क्षेत्र है। अतः इस क्षेत्र की क्षमता को पहचानते हुए राज्य सरकार इसकी सम्पूर्ण क्षमता का दोहन करना चाहती है। अतः राज्य सरकार ने एमएसएमई क्षेत्र को एक प्रमुख क्षेत्र माना है जिसमें निवेश की आवश्यकता है।

सुक्ष्म, लघु और मझौले उद्यमों की चतुर्थ अखिल भारतीय जनगणना के अनुसार, एमएसएमई क्षेत्र में कुल एंटरप्राइजेज की संख्या 361.76 लाख है। इसका निर्यात में 40 प्रतिशत और जीडीपी में लगभग 8 प्रतिशत योगदान है। इसी के चलते प्रधानमंत्री के मेक इन इण्डिया अभियान में एमएसएमई सेक्टर पर भी जोर दिया गया है, ताकि घरेलू निर्माण को प्रोत्साहन मिल सके।
नयी एमएसएमई नीति 2015 होगी जारीइस अवसर पर नयी राजस्थान एमएसएमई नीति 2015 भी जारी की जायेगी। इस नीति को इस लक्ष्य के साथ बनाया गया है कि प्रदेश में सुक्ष्म, लघु और मझौले उद्यमों को प्रोत्साहन और बढावा मिले ताकि इन उद्योगों को वैश्विक क्षमता प्राप्त करने के लिए अनुकूल वातावरण मिल सके।
इसमें अनेक नीतिगत मापदण्डों का समावेश किया गया है, जैसे कि स्टेट एमएसएसई फैसिलिटेशन काउंसिल को और मजबूत करना, एमएसएसई समूहों को उत्पादन केन्द्र के रूप में विकसित करना, स्टार्टअप कारोबार एवं उभरते उद्यमियों को प्लग एंड प्ले जैसी सुविधा उपलब्ध करवा कर सहयोग देना,पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ रुग्ण उद्योगों के पुनर्वास एवं पुनरुद्धार में सहयोग करना शामिल है।