
रिटायर्ड आइएएस सुबोध अग्रवाल (फाइल फोटो)
जयपुर। जल जीवन मिशन घोटाले को लेकर भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी सुबोध अग्रवाल की तलाश के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने लुकआउट नोटिस जारी करवाया है, वहीं अग्रवाल ने एफआइआर को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में सुबोध अग्रवाल ने हाईकोर्ट से एफआइआर रद्द करने की गुहार की है।
याचिका में आरोप लगाया कि जेजेएम में जिन स्वीकृतियों पर विवाद है, उनमें से 90 प्रतिशत तो सुधांश पंत के जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रहते समय की हैं।
इधर, सुबोध अग्रवाल की तलाश में एसीबी ने दिल्ली में पांच ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन सुबोध अग्रवाल का पता नहीं चल सका। एसीबी की टीम उनकी तलाश में दिल्ली में ही डेरा डाले हुए है।
गिरफ्तार सभी 10 आरोपियों से एसीबी मुख्यालय में डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह, एसआइटी के अध्यक्ष पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ के नेतृत्व में टीम ने करीब 8 घंटे पूछताछ की। इस दौरान आरोपी दलाल मुकेश पाठक ने बताया कि केरल में जाकर उसे विजय शंकर बनना था और होटल के कमरे को इरकॉन का दफ्तर जैसा लुक देना था। इसके बदले में ठेकेदार महेश मित्तल ने उसको 15 लाख रुपए दिए थे।
एसीबी ने उससे मिली जानकारी पर दोनों के बैंक खातों को खंगाला, जिसमें 15 लाख रुपए लेन देन होना साबित भी हुआ। वहीं, अन्य आरोपियों से भी फर्जी प्रमाण पत्र का पता होने के बावजूद करोड़ों रुपए के टेंडर जारी करने के संबंध में पूछताछ की गई।
डॉ. रामेश्वर सिंह ने बताया कि फरार एसई जितेन्द्र शर्मा व तत्कालीन एसई मुकेश गोयल के खिलाफ भी लुकआउट नोटिस जारी करवाया है। उन्होंने बताया कि फरार चौथे आरोपी संजय गुप्ता का पासपोर्ट नहीं बना है। गौरतलब है कि बुधवार को सुबोध अग्रवाल के खिलाफ भी लुकआउट नोटिस जारी करवाया गया था।
गिरफ्तार सीई (प्रशासन) दिनेश गोयल, सीई (ग्रामीण) केडी गुप्ता, एसीई (जयपुर क्षेत्र-द्वितीय) सुभांशु दीक्षित, वित्तीय सलाहकार (अक्षय ऊर्जा) सुशील शर्मा, चूरू सीई निरिल कुमार, निलम्बित एक्सईएन विशाल सक्सेना, सेवानिवृत सीई अरुण श्रीवास्तव, सेवानिवृत सीई दिलीप कुमार गौड, सेवानिवृत्त एसई महेन्द्र प्रकाश सोनी, दलाल मुकेश पाठक से पूछताछ की जा रही है।
Updated on:
19 Feb 2026 10:01 pm
Published on:
19 Feb 2026 10:01 pm
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