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लापरवाही पर ‘इनाम’: JDA में जिसे मिली सजा, रीको ने उसे दी ‘मलाईदार’ पोस्ट

राजस्थान के सरकारी सिस्टम में 'ऊपर' तक पहुंच हो तो सजा भी पुरस्कार में बदल जाती है। इसका ताजा उदाहरण नगरीय विकास विभाग और रीको (RIICO) के बीच देखने को मिला है। जिस इंजीनियर को मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के निर्देश पर गंभीर लापरवाही के लिए पदमुक्त (APO) किया गया था, उसे अब रीको जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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जयपुर

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Ashwani Kumar

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Ashwani Bhadauria

Apr 23, 2026

Street Lights- Demo Pic

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जयपुर। राजस्थान के सरकारी सिस्टम में 'ऊपर' तक पहुंच हो तो सजा भी पुरस्कार में बदल जाती है। इसका ताजा उदाहरण नगरीय विकास विभाग और रीको (RIICO) के बीच देखने को मिला है। जिस इंजीनियर को मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के निर्देश पर गंभीर लापरवाही के लिए पदमुक्त (APO) किया गया था, उसे अब रीको जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।

क्या है पूरा मामला?
हरमाड़ा की शक्ति नगर कॉलोनी में एक हाई मास्ट लाइट खराब होने की शिकायत 17 नवंबर, 2025 को संपर्क पोर्टल पर दर्ज हुई थी। सरकारी तंत्र की सुस्ती का आलम यह रहा कि यह फाइल 83 बार जेडीए और नगर निगम के बीच फुटबॉल बनी रही। अंततः 27 फरवरी को ऊपरी दबाव के बाद लाइट ठीक हुई। जांच में दोषी पाए जाने पर जेडीए के विद्युत शाखा के एक्सईएन विजय कुमार को 27 मार्च को एपीओ कर दिया गया था।

सस्पेंशन की जगह मिली 'मलाईदार' पोस्टिंग
सूत्रों के मुताबिक, सीएमओ से अधिकारी को सस्पेंड करने के निर्देश थे, लेकिन तकनीकी कारणों से जेडीए ने उन्हें एपीओ कर मूल विभाग (नगरीय विकास विभाग) भेज दिया। वहां कार्रवाई होने के बजाय मामला पूरी तरह पलट गया। विभाग ने उन्हें सीधे रीको (RIICO) में प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया है।

रीको में 2000 करोड़ के काम
वर्तमान में रीको प्रदेशभर में विद्युत शाखा के 2000 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्य कर रहा है। जहां केवल दो एक्सईएन पर भारी कार्यभार है।

एक नजर में
-शिकायत का चक्कर: एक लाइट के लिए पीड़ित को 83 बार पोर्टल पर धक्के खाने पड़े।
-दोषी पर मेहरबानी: लापरवाही सिद्ध होने के बाद भी अधिकारी को बड़ी जिम्मेदारी दी गई।
-सिस्टम का खेल: सीएमओ के निर्देशों के बावजूद कठोर कार्रवाई के बजाय 'पसंदीदा' जगह पोस्टिंग।