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पुरातनकाल से खनिज खनन की समृद्ध परंपरा…2000 साल पुराने खनन साक्ष्य भी उपलब्ध

राजस्थान में पुरातनकाल से ही खनिज खनन की समृद्ध परंपरा रही है। प्रदेश में दो हजार साल से पहले के खनिज खनन के साक्ष्य उपलब्ध है।

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पुरातनकाल से ही प्रदेश में खनिज खनन की समृद्ध परंपरा...2000 साल पुराने खनन साक्ष्य भी उपलब्ध

पुरातनकाल से ही प्रदेश में खनिज खनन की समृद्ध परंपरा...2000 साल पुराने खनन साक्ष्य भी उपलब्ध

राजस्थान में पुरातनकाल से ही खनिज खनन की समृद्ध परंपरा रही है। प्रदेश में दो हजार साल से पहले के खनिज खनन के साक्ष्य उपलब्ध है। खनिज क्षेत्र में निवेश व रोजगार की अपार संभावनाओं और आर्थिक विकास में सहभागिता का इसी से अंदाज लगाया जा सकते हैं कि प्रदेश में खनिज क्षेत्र में 45 सीमेंट फेक्ट्रियों के साथ ही एचजेडएल जैसी मल्टीनेशनल कंपनियां कार्य कर रही है। निदेशक माइंस एवं पेट्रोलियम संदेश नायक ने कहा कि रॉकफास्फेट, लेड, जिंक आदि के खनन में राजस्थान समूचे देश में अग्रणी है। विभाग की ओर से खनिज ब्लाकों की नीलामी में तेजी लाई गई है और प्रीमियम दरों पर ब्लॉकों की नीलामी हो रही है।

यह भी पढ़ें : प्रदेश में लेड, जिंक और सिल्वर के विपुल भण्डार...खनिज ब्लॉकों की नीलामी की तैयारी में सरकार

जीएसआई 1851 से कर रही है खनिज खोज का कार्य

जीएसआई के अपर महानिदेशक जय लाल ने बताया कि जीएसआई द्वारा 1851 से खनिज खोज का कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में खनिज खोज की 64 रिपोर्ट दी जा चुकी है। कंपोजिट लाइसेंस के लिए 35 जियोलोजिकल मेमोरेंडम दिए गए हैं। पोटाश क्षेत्र के खोज की अंतिम रिपोर्ट अगस्त-सितंबर तक राज्य सरकार को दे दी जाएगी।