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Right to Health Bill: ये विरोध कहीं न बन जाए गहलोत सरकार की संजीवनी !

राइट टू हेल्थ को लेकर ट्रेंड और चर्चा गहलोत सरकार को दे सकती है बड़ा फायदा !

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Right to Health Bill: ये विरोध कहीं न बन जाए गहलोत सरकार की संजीवनी !

Right to Health Bill: ये विरोध कहीं न बन जाए गहलोत सरकार की संजीवनी !

जयपुर। इन दिनों प्रदेश में हर तरफ राइट टू हेल्थ बिल की चर्चा हो रही है। डॉक्टर इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। जिनको इस बारे में समझ कम थी वो भी इसको समझने की कोशिश कर रहे हैं। क्योंकि इससे मरीजों को दिक्कत हो रही है। सोशल मीडिया पर भी राइट टू हेल्थ संजीवनी है, ट्रेंड हो रहा है। राइट टू हेल्थ को लेकर ये ट्रेंड और चर्चा गहलोत सरकार को बड़ा फायदा दे सकती है। इस बार राजस्थान सरकार ने चिरंजीवी योजना में मुफ्त इलाज का दायरा 5 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपए कर दिया है। राज्य सरकार के लिए यह संजीवनी साबित हो सकती है। ये बिल हर व्यक्ति को इलाज की गारंटी से जुड़ा है।राजस्थान में इस साल के आखिर में चुनाव है।

यह भी पढ़ें : Right to Health Bill का विरोध: प्रदेशव्यापी मेडिकल महाबंद, एसएमएस में वैकल्पिक व्यवस्था

हाल ही सीएम अशोक गहलोत ने जब अपने ट्विटर हैंडल पर इस बिल के फायदे को लेकर एक वीडियो इस कैप्शन से शेयर से किया, ये वीडियो दिखाता है कि क्यों हर राज्य के लिए जरूरी है 'राइट टू हेल्थ'- RTH , तो इस पर लोगों के जबरदस्त रिएक्शन आए। वीडियो को 9000 बार रीट्वीट किया गया। बहुत से लोगों ने लिखा, राजस्थान सरकार का राजस्थान की जनता के लिए सबसे बेहतरीन कदम। #राइट_टू_हेल्थ_संजीवनी_है।

गौरतलब है इस बिल में अस्पतालों और क्लीनिक से राजस्थान के लोगों को फ्री मेडिकल सेवा का लाभ मिल जाएगा। बिल के बाद सरकारी और प्राइवेट अस्पताल मरीज के इलाज से अब मना नहीं कर सकेंगे। बिल के प्रावधानों को नहीं मानने वाले और दोषी पाए जाने पर 10-25 हजार का जुर्माना लग सकता है। इस फैसले को सिविल कोर्ट में चुनौती भी नहीं दी जा सकती है।

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