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विनोद की बच्ची को पाल रहा था मनीष, कुदरत ने ऐसा कहर ढाया कि खुद की दो मासूम बच्चियां भी हो गईं बेसहारा

एक ही परिवार के दो बेटे हादसों के शिकार हुए, अब तीनों मासूम बेटियों की पढ़ाई और परवरिश का संकट
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jaipur

विनोद की बच्ची को पाल रहा था मनीष, कुदरत ने ऐसा कहर ढाया कि खुद की दो मासूम बच्चियां भी हो गईं बेसहारा

दीपशिखा वशिष्ठ / जयपुर. यह दास्तां है ऐसे परिवार की, जो आम ही है लेकिन आम परिवारों से जरा अलग। जागरूक और जुझारू। लेकिन नियती ने ऐसा कहर ढाया कि परिवार बेसहारा हो गया। दो बेटे थे लेकिन दोनों सड़क हादसों के शिकार हो गए। अब 6 सदस्य हैं लेकिन सभी मजबूर। इनमें 2 बूढ़े हैं, 3 मासूम बच्चियां और एक 30 साल की बहू। क्या करें, कैसे जीएं? कैसे करें गुजर-बसर? पढि़ए अवैध बजरी परिवहन और वाहनों की बेलगाम रफ्तार के शिकार हुए इस परिवार की व्यथा।

बम्बाला (प्रतापनगर) निवासी 63 वर्षीय कैलाशचंद सेन। उनके दो बेटे, बड़ा विनोद और छोटा मनीष। परिवार का बड़ा बेटा था, इसलिए बड़े अरमानों से विनोद की शादी हुई। पूनम बड़ी बहू के रूप में घर आई लेकिन कैलाश के लिए वह बहू कम बेटी ही ज्यादा थी। बहू को परिवार ने हमेशा बेटी की तरह समझा लेकिन नियती को परिवार की खुशियां शायद मंजूर न थीं। वर्ष 2007 में एक सड़क हादसा विनोद को हमेशा के लिए दुनिया से ले गया। उसकी कार को रोडवेज बस ने टक्कर मार दी, जिसमें उसकी मौत हो गई। तब उसकी पत्नी पूनम की उम्र 24 साल थी। कैलाश और उनके परिवार ने सोचा, इतनी कम उम्र में एकल हुई पूनम कैसे लम्बा जीवन गुजार पाएगी। उन्होंने उसकी दोबारा शादी करा दी। पूनम की बेटी चाहत का मसला आया तो मनीष आगे आया। उसने भतीजी चाहत की पढ़ाई और परवरिश का जिम्मा संभाला।

भतीजी को वह अपनी सन्तान की तरह ही पाल रहा था लेकिन...। पिछले मंगलवार को वह भी दुनिया छोड़ गया। शास्त्रीनगर में अवैध बजरी भरकर बेलगाम दौड़ रही ट्रैक्टर ट्रॉली ने उसकी जान ले ली। वह तो अपनी पत्नी राधा को एमए फाइनल की परीक्षा दिलाने शास्त्रीनगर ले गया था। राधा को परीक्षा केन्द्र में छोड़कर बाहर पेड़ के नीचे बाइक खड़ी की और परीक्षा खत्म करने का इन्तजार कर रहा था। इतने में अवैध बजरी से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली आई। इतनी स्पीड में कि सामने ऑटो आने पर ब्रेक लगाए तो रुकी नहीं बल्कि बेकाबू हो गई। ऑटो के बाद खंभे से भिड़ी, फिर पेड़ से टकराकर मनीष पर आ गिरी। मनीष बजरी और ट्रॉली के नीचे दब गया। भीतर परीक्षा दे रही राधा की मांग का सिन्दूर उजड़ गया। भतीजी चाहत के सिर से फिर पिता का साया उठ गया। जो मनीष अपनी भतीजी की परवरिश का जिम्मा उठा रहा था, उसकी खुद की 2 मासूम बेटियां बेसहारा हो गईं।

विनोद और मनीष को तो सड़कों पर सरपट दौड़ती मौत ले गई। परिवार में अब उनके पिता कैलाशचन्द (63), मां कौशल्या (60), विनोद की बेटी चाहत (12), मनीष की पत्नी राधा (30), मनीष की बेटी भूमिजा (5) और यशस्वी (4) हैं। विनोद और मनीष ही इन सबका सहारा थे। दोनों के जाने के बाद अब बुजुर्ग माता-पिता और राधा का रो-रोकर बुरा हाल है। राधा को रह-रहकर यही चिन्ता सताती है कि अब परिवार का पेट कौन भरेगा। तीनों बच्चियों की पढ़ाई कैसे होगी। परिवार में इकलौता कमाने वाला मनीष ही था।

कपड़ों की दुकान चलाकर परिवार पाल रहा था। राधा को भी आगे पढ़ा रहा था ताकि परिवार में मदद मिले। लेकिन असमय काल का ग्रास बन गया। पिता कैलाशचंद भी चिन्तित हैं। कहते हैं, मैं मजबूर हंू। पूनम की तो दोबारा शादी करा दी थी मगर राधा की नहीं करा सकता। वह महज 30 साल की है लेकिन क्या करूं? मैं अस्थमा का मरीज हंू और कौशल्या को हाइपरटेंशन की शिकायत है। राधा की दोबारा शादी करा दंू तो तीनों पोतियों को कौन संभालेगा? हम दोनों बूढ़े-बूढिय़ों को कौन देखेगा? राधा को भेज दिया तो घर संभालने वाला कौन बचेगा?