
बेटे को परेशान देख, किया बड़ा आविष्कार
इनका जन्म 1840 में स्कॉटलैंड में हुआ था। जन्म समय से दो महीने पूर्व ही हो गया था, मां को यह लगता था कि उनका बेटा ज्यादा दिनों तक नहीं जी पाएगा लेकिन पूरी जिदंगी इन्हें किसी तरह की शारीरिक समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ा, बल्कि इन्होंने दुनिया के लिए बहुत उपयोगी आविष्कार भी कर दिखाया। स्कूली शिक्षा के बाद इन्होंने पशु चिकित्सा विज्ञान में शिक्षा पूर्ण की। पशु चिकित्सक बनने के बाद 10 साल तक इन्होंने अपने घर से ही काम किया। इसके बाद 1867 में ये आयरलैंड चले गए। कॅरियर का अधिकांश समय आयरलैंड में ही निकला। आयरलैंड में इन्होंने अपना वेटेनरी क्लिनिक स्थापित कर लिया था। 1871 में इनका विवाह हुआ और ये एक बेटी और बेटे के पिता बने। 1887 में इन्होंने अपने नौ साल के बेटे के लिए एक ट्राईसाइकिल खरीदी। इस साइकिल में ठोस रबड के टायर लगे हुए थे। जब बेटा उबड़-खाबड़ सडक़ पर साइकिल को चलाता तो उसे झटके लगते थे। बेटे ने पिता से शिकायत की कि साइकिल बेकार है। उसे चलाने में झटके लगते हैं। बेटे की परेशानी को देखते हुए इनके दिमाग में टायर बनाने का आइडिया आया।
क्लिनिक नहीं, अब चलाते थे कंपनी
इसके दो वर्ष बाद 1890 में वेल फास्ट की के कंपनी ने टायर का निर्माण आरंभ कर दिया। इस तरह साइकिल टायर का व्यावसायिक निर्माण शुरू हुआ। कार टायर का निर्माण 1900 से पहले शुरू नहीं हो पाया था। इस कंपनी में डनलप के 1500 शेयर थे। बाद में यह कंपनी डनलप रबड़ कंपनी के नाम से प्रसिद्ध हुई। इनके टायरों से साइकिल की दुनिया में क्रांति आ गई। ये आविष्कारक कोई और नहीं बल्कि जॉन डनलप थे। मोटर उद्योग में भी नए टायरों के आविष्कार ने क्रांति ला दी थी। इनसे पूर्व 1846 में स्कॉटलैंड के इंजीनियर रोबर्ट विलियम थोमसन ने भी टायर के आविष्कार को पेटेंट करवाया था, लेकिन इनका आविष्कार हवा भरे जाने वाले टायर का नहीं था। डनलप की कंपनी को विश्वभर में पहचान मिली। यातायात वाहनों में भी रबड़ वाले इन्हीं टायरों का उपयोग तेजी से प्रचलित हुुआ। 1921 में स्कॉटलैंड में जॉन डनलप का निधन हो गया था।
Published on:
14 Jul 2020 01:05 pm
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