
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashko Gehlot) ने परीक्षा माफिया पर कड़ी नजर रखने के लिए पिछले साल एंटी-चीटिंग सेल की स्थापना की थी और इसमें 9 पद सहित साधन-संसाधन भी स्वीकृत किए थे। इसके बावजूद आरपीएससी वरिष्ठ शिक्षक भर्ती पेपर लीक करने वाले भूपेंद्र सारण और सुरेश ढाका इसकी सर्विलांस से बचने में कामयाब कैसे रहे। यह अब भी एक सवाल बना हुआ है।
पूरी साजिश के दो सरगना जयपुर से भागने में कामयाब रहे, जब उन्हें पता चला कि उदयपुर पुलिस ने एक होटल पर छापा मारा है। पुलिस कार्रवाई के बारे में सारण और ढाका को किसने सूचना दी थी, यह अभी तक ज्ञात नहीं है। इससे भी बड़ा सवाल है कि नवगठित एंटी-चीटिंग सेल ऐसे बदमाशों को लगातार जांच के दायरे में रखने में विफल क्यों रहा। विशेष सूचना मिलने के बाद उदयपुर पुलिस ने इस रैकेट का भंडाफोड़ किया।
परीक्षा माफिया पर नजर रखने के लिए सेल बनाया गया था, फिर भी यह अपने काम को पूरा करने में विफल रहा। मामले का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू सारण और उसके परिवार द्वारा संचालित जाली डिग्री घोटाला था जिसका भंडाफोड़ किया गया था। सारण फर्जी डिग्रियां छाप रहा था, लेकिन लंबे समय से किसी भी एजेंसी को उसकी गतिविधियों का अंदाजा क्यों नहीं था। इस बीच, राजस्थान पुलिस ने कहा है कि सघन तलाशी अभियान जारी है और जल्द ही सारण और ढाका दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
सीएम अशोक गहलोत ने ट्वीट कर किया था यह दावा:
सीएम गहलोत ने पिछले साल 30 मार्च को ट्विट करते हुए दावा किया था कि एंटी—चीटिंग यूनिट में एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एक पुलिस निरीक्षक और एक पुलिस उप निरीक्षक सहित कुल 9 पदों और वाहन सहित अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की स्वीकृति प्रदान की है। राज्य बजट 2022-23 में भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता रोकने के लिए इस एंटी चीटिंग सेल के गठन की घोषणा की थी। गहलोत ने तब कहा था कि इससे पहले इसी साल फरवरी में सरकार ने राजस्थान परीक्षा विधेयक 2022 पेश किया था। इस इकाई के गठन से प्रदेश में विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक होने, नकल सहित अन्य अनियमितताओं को रोकने में मदद मिलेगी और इनसे संबंधित प्रकरणों में प्रभावी तफ्तीश कर अपराधियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने में सहायता मिलेगी।
Published on:
12 Jan 2023 03:10 pm
