शहर की सबसे व्यस्ततम रोड हाईकोर्ट रोड रात को 'बेघरों की रोड' बन जाती है। पावटा चौराहे से लेकर दर्पण चौराहे तक करीब सौ भिखारी सड़क के दोनों तरफ सोते हैं। रविवार की रात को यहां 96 भिखारी थे। इसमें से अधिकतर एेसे बेघर है जो अकेले ही गुजर बसर करते हैं। करीब एक दर्जन परिवार भी यहां है।
विशेष बात यह है कि यहां भिखारियों के स्थान भी तय है और वे प्रतिदिन अपने निश्चित स्थान पर ही सोते हैं और उठते हैं। नगर निगम की आेर से यहां रैनबसेरा भी बनाया हुआ लेकिन वहां केवल 5-6 लोग ही सोते हैं। शेष भिखारी रेलवे लाइन पर बने फुटपाथ और टाऊन हॉल के किनारे बने फुटपाथ पर रात काटते हैं।
यहां फुटपाथ पर सोने का नियम है। हर कोई भिखारी इस फुटपाथ पर नहीं सो सकता। हाईकोर्ट रोड से लेकर दर्पण सिनेमा तक फुटपाथ पर प्रत्येक भिखारी ने अपनी जगह तय कर रखी है। वह दिन में कहीं पर भी हो, रात को यहां लौट ही आता है।
एक भिखारी दूसरे भिखारी की जगह का अतिक्रमण नहीं करता। अगर कभी एेसा होता भी है तो नोंक झोंक शुरू हो जाती है। अन्य भिखारी भी अपने साथी का पक्ष लेते हैं। दो तीन भिखारी तो एेसे हैं तो किसी की स्टॉल अथवा दुकान की रखवाली, उसके बाहर सोकर करते हैं। वे लम्बे अरसे से यहां सोते आए हैं।