जयपुर. जयपुर कमिश्नरेट को दिए गए चलते फिरते थाने मोबाइल इन्वेस्टिगेशन यूनिट (एमआईयू वैन) में अब जंग लगने लगी है। एक वर्ष पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हरी झंडी दिखाकर राजस्थान पुलिस को 48 एमआईयू वैन दी थी। एक वैन की कीमत करीब 15 लाख है। इस तरह जयपुर कमिश्नरेट के पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण जिला पुलिस को 60 लाख की चार एमआईयू वैन दी गईं थी। उस समय पुलिस ने दावा किया था कि गंभीर अपराध होने पर पुलिस अधिकारी त्वरित गति से मौके पर पहुंचेंगे और इसकी मदद से मौके पर अनुसंधान करेंगे। इससे गवाहों को बुलाना नहीं पड़ेगा। लेकिन एमआईयू में न संसाधन लगे और न ही स्टाफ। इसके चलते अब इस वैन एफएसएल को देने की तैयारी की जा रही है।
वाहन बदलने के लिए जाना पड़ेगा…
वैज्ञानिकों की मानें तो अभी जयपुर कमिश्नरेट के चारों जिलों में एफएसएस की एक मोबाइल यूनिट घटना स्थल पर पहुंचती है, जो दूसरी घटना की सूचना मिलने पर मौके से ही दूसरे स्पॉट पर पहुंचती है। लेकिन एमआईयू वैन मिलने के बाद यदि पूर्व क्षेत्र में घटना होती है तो वैज्ञानिकों को उस क्षेत्र की वैन ले जानी पड़ेगी। इसी दौरान यदि पश्चिम क्षेत्र में कोई घटना होती है तो वैज्ञानिकों को पहले एफएसएल मुख्यालय जाना पड़ेगा, फिर उस जिले की एमआईयू वैन के साथ घटना स्थल पर पहुंचना पड़ेगा। इससे समय और ईंधन की बर्बादी अधिक होगी।
एमआईयू वैन में कम्प्यूटर, कैमरे और अन्य कुछ उपकरण लगने थे। लेकिन उपकरण के नहीं मिलने से यह वैन स्पेशल इन्वेस्टिगेशन के काम नहीं आ सकी।
-अरशद अली, डीसीपी हैड क्वार्टर
प्रस्ताव मिला है कि पुलिस के साथ एमआईयू वैन में एफएसएल के वैज्ञानिक मौके पर एक साथ चले जाएं। वैन में अभी पूरे उपकरण नहीं लगे हैं, जिसके चलते यह प्रस्ताव आया है।
-डॉ. अजय शर्मा, निदेशक, एफएसएल